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Chhattisgarh: अदाणी की 2 कोयला खनन परियोजनाओं को मंजूरी, रायगढ़ जिले में फिर कटेंगे हजारों पेड़

Chhattisgarh: अदाणी की 2 कोयला खनन परियोजनाओं को मंजूरी, रायगढ़ जिले में फिर कटेंगे हजारों पेड़
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में 1000 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर खनन का रास्ता साफ हो गया है। पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) ने
अदाणी समूह से जुड़ी दो कोयला परियोजनाओं को चरण-1 की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मंजूरी के बाद 52,000 से अधिक पेड़ों की कटाई का खतरा मंडरा रहा है।

किन दो परियोजनाओं को मिली मंजूरी

  1. पेलमा ओपनकास्ट खदान - SECL
    इसके लिए 360 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि प्रस्तावित है। SECL ने 2023 में अदाणी एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी पेलमा कोलियरीज के साथ खदान संचालन का समझौता किया था।
  2. पुरुंगा भूमिगत कोयला ब्लॉक - अंबुजा सीमेंट्स
    अदाणी समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड की इस परियोजना के लिए 620 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि मांगी गई है।

7 जुलाई की FAC बैठक में दोनों को शर्तों के साथ चरण-1 मंजूरी की सिफारिश की गई। अंतिम मंजूरी चरण-2 प्रतिपूरक वनीकरण जैसी शर्तें पूरी होने के बाद मिलेगी।

52,000 पेड़ कटेंगे, पर्यावरण पर पड़ेगा असर

FAC रिपोर्ट में कहा गया है कि तमनार तहसील की पेलमा खदान के लिए 52,000 से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।
यह क्षेत्र उच्च संरक्षण मूल्य (HCV) वाले घने जंगल में आता है। पास से केलो नदी भी बहती है, जिससे पर्यावरणीय चिंता और बढ़ गई है।

ग्रामीणों का विरोध, विस्थापन का डर

तमनार ब्लॉक के पेलमा में SECL और अदाणी के 15 MTPA क्षमता वाले संयुक्त उपक्रम को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। जून में हुई जनसुनवाई के दौरान लोगों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था, लेकिन उसे औपचारिकता बताकर खारिज कर दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है उन्हें "विकास के नाम पर विस्थापन मंजूर नहीं"। अब उन्हें अपनी जमीन, जंगल और आजीविका छिनने का डर सता रहा है।

इस मंजूरी के बाद रायगढ़ में औद्योगिक विकास को भले ही गति मिलेगी, मगर अब पर्यावरण और आदिवासी विस्थापन को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर कोल खनन परियोजना की मंजूरी और शर्तों के पालन पर है।

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