रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य तंत्र को खोखला करने वाले बहुचर्चित सीजीएमएससी रीएजेंट घोटाले के मास्टरमाइंड शशांक चोपड़ा को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के खिलाफ एक सुनियोजित हमला है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपी का कृत्य राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला है और ऐसे अपराधियों को जमानत देने से पूरे समाज में गलत संदेश जाएगा।

कैसे रची गई थी करोड़ों की साजिश?

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में 341 करोड़ के रीएजेंट घोटाले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा और उनके साथियों ने टेक्निकल अफसरों से सांठगांठ कर पूरी निविदा प्रक्रिया को भ्रष्ट कर दिया।

जानकारी के अनुसार, निविदा में तकनीकी अधिकारियों को रिश्वत देकर मोक्षित कॉर्पोरेशन ने टेंडर हासिल किया। बाद में बेहद ऊंचे दामों पर सामग्री सप्लाई की गई। उदाहरण के तौर पर, 8 रुपये में उपलब्ध क्रीम को 23 रुपये में बेचा गया। रीएजेंट्स और मशीनों के दाम भी मनमाने तरीके से बढ़ा दिए गए।

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इतना ही नहीं, कई जिलों के अस्पतालों में जिन मशीनों की आपूर्ति दिखाई गई थी, उन्हें कभी इंस्टॉल ही नहीं किया गया। कुछ जगहों पर स्थापित मशीनें भी बाद में लॉक कर दी गईं। इस वजह से लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान सरकारी खजाने को उठाना पड़ा। अकेले 95 लाख रुपये के रीएजेंट्स बेकार हो गए।

फिलहाल तक क्या हुई कार्रवाई?

इस संगठित भ्रष्टाचार की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शशांक चोपड़ा के खिलाफ IPC की धारा 409, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अब तक कई सरकारी अधिकारी भी इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।

शशांक चोपड़ा को कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा गया था। जमानत की गुहार के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट का स्पष्ट संदेश

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि आरोपी का कृत्य न केवल संगठित आर्थिक अपराध है, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य और जनकल्याण पर पड़ा है।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में जमानत देना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा होगा और इससे आमजन का न्याय व्यवस्था से भरोसा डगमगा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने शशांक चोपड़ा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।