बस्तर का मांझीपाल बना नया इको-टूरिज्म हब:

टीआरपी। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित मनोरम ग्राम मांझीपाल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की इस विशेष पहल से बस्तर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर चमकने लगा है, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं।

इस कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म मॉडल से बस्तर के आदिवासी युवाओं के लिए गांव में ही रोजगार के स्थायी रास्ते खुले हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर पलायन में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, बाहरी दुनिया के पर्यटकों के आगमन से बस्तरिया हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल रही है।

रोमांच और आत्मीयता का अनूठा संगम


मांझीपाल की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ बहने वाली निर्मल कांगेर नदी है, जहाँ स्थानीय आदिवासियों द्वारा तैयार पारंपरिक बांस की नावों पर होने वाली बैम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को बेहद रोमांचित कर रही है। इसके साथ ही, यहाँ का “आमचो लाड़ी” होमस्टे विदेशी मेहमानों के बीच भी बस्तरिया व्यंजनों के स्वाद और आत्मीय मेजबानी के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस व्यवस्था से स्थानीय युवाओं को प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड, राफ्टिंग संचालक और होमस्टे प्रबंधन के जरिए सीधा रोजगार मिल रहा है।

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कैसे पहुँचें मांझीपाल?


यह खूबसूरत पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय जगदलपुर से मात्र 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जगदलपुर से दरभा मार्ग होते हुए बेहतरीन पक्की सड़क द्वारा निजी वाहन या स्थानीय टैक्सी से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा भी जगदलपुर में ही स्थित है।


दूरी और संपर्क: जिला मुख्यालय जगदलपुर से 35-40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, सड़क मार्ग से सुगम पहुंच।

मुख्य आकर्षण: कांगेर नदी में पारंपरिक बैम्बू राफ्टिंग और ग्रामीण जीवन का अनुभव देने वाला “आमचो लाड़ी” होमस्टे।

रोजगार मॉडल: पूर्णतः कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म (सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन) पर आधारित, जो स्थानीय आदिवासियों को आत्मनिर्भर बना रहा है।

आने वाले पर्यटन सीजन में मांझीपाल में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद है। पर्यटन मंडल की इस सफलता को देखते हुए बस्तर संभाग के अन्य आदिवासी बाहुल्य गांवों में भी इसी तरह के कम्युनिटी-बेस्ड इको-टूरिज्म मॉडल को लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

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रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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