टीआरपी। भिलाई-3 में जमीन बंटवारे के बदले रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद आरोपी पटवारी का मुख्यालय तहसील कार्यालय अहिवारा नियत किया गया है।
यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है, जिससे आम जनता का प्रशासनिक पारदर्शिता पर भरोसा मजबूत होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारियों द्वारा किए जाने वाले मनमाने व्यवहार और अवैध वसूली पर यह एक कड़ा प्रहार है, जो अन्य लोक सेवकों के लिए भी बड़ी चेतावनी है।
वायरल वीडियो और जांच का ब्यौरा
यह मामला जमीन बंटवारे के बदले 45 हजार रुपये के लेनदेन से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अहिवारा तहसीलदार ने पूरे मामले की गहन जांच की। जांच में प्रार्थी अमन कुमार टंडन और भूमिस्वामी उत्तम टंडन ने पुष्टि की कि उन्होंने काम के बदले पटवारी को राशि दी थी। पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर ने राशि लेने की बात स्वीकार की, लेकिन अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा कि उन्होंने पैसे उधार लिए थे और वेतन मिलने पर वापस करने वाले थे।
नियमों का उल्लंघन और कार्रवाई
प्रशासन ने पटवारी के इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-03 और नियम-14 का स्पष्ट उल्लंघन पाया है। इसे गंभीर कदाचरण मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत निलंबन की दंडात्मक कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में पटवारी को केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा।
आरोपी: पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर, हल्का नंबर (भिलाई-3)।
रिश्वत की राशि: 45,000 रुपये जमीन बंटवारे के नाम पर।
जांच अधिकारी: तहसीलदार अहिवारा द्वारा की गई पुष्टि।
कार्रवाई का आधार: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो साक्ष्य।
निलंबन के साथ ही अब पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू की जाएगी। यदि दोष पूर्णतः सिद्ध हो जाते हैं, तो उन्हें सेवा से बर्खास्त करने जैसी कठोर कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।


