Bhilai Steel Plant Iron Theft Case: भाजपा विधायक ही इन दिनों चोरी, वसूली और भ्रष्टाचार से परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि विधायक का सोशल मीडिया में गुस्सा फूट रहा है। दरअसल, भिलाई के वैशाली नगर विधानसभा से विधायक रिकेश सेन ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर लोहा चोरी में ट्रांसपोर्ट यूनियन और अधिकारियों से नेताओं पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
इस पर कांग्रेस ने भी तंज कसा है। उनके पोस्ट के साथ कांग्रेस ने लिखा कि लीजिए भाजपा विधायक खुद,अपनी ही सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं। हाल ये है कि पार्टी और सरकार में इनकी फरियाद सुनने वाला कोई बचा नहीं, इसलिए बेचारे सोशल मीडिया पर ही अपना दर्द और भड़ास निकाल रहे हैं। जब खुद भाजपा का विधायक भ्रष्टाचार से परेशान हों, तो आम जनता का क्या हाल होगा। दरअसल, यह पूरा मामला भिलाई स्टील प्लांट से लोहा चोरी मामले में उनका दर्द छलका है।
विधायक रिकेश सेन ने पोस्ट यह लिखा
विधायक रिकेश सेन ने लिखा कि भिलाई इस्पात संयंत्र में ट्रांसपोर्ट यूनियन ही लाखों रुपए गाड़ियों से वसूलता है। इसका पैसा 4 आईपीएस, 3 आईएएस और 12 नेताओं तक पहुंचने का भी आरोप बीजेपी विधायक रिकेश सेन ने लगाया है। साथ ही उन्होंने अपनी ही सरकार होने के बावजूद सीबीआई को यह सारी बातें बताने का दावा भी किया है। वहीं, वर्तमान में उनकी ही पार्टी सत्ता में है। ऐसे में वे उन्हें भी इस मामले की शिकायत कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया और सीबीआई पर ही भरोसा होने का दावा किया जा रहा है।
ऐसे खुला था पूरा मामला
26 मई को पुलिस ने भिलाई के हथखोज और अकलोरडीह स्थित ए के ट्रेडर्स पर छापा मारा था। मौके से करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया गया था। इसके अलावा स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल होने वाले कई वाहन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनें भी जब्त की गई थीं। जब्त सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपए आंकी गई थी। इसमें लगभग 90 लाख रुपए का लौह स्क्रैप शामिल था। इस मामले में प्लांट के महाप्रबंधक, AGM और कथित मास्टरमाइंड सहित 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं इस मामले में वैशाली नगर मंडल के भाजपा कोषाध्यक्ष और कारोबारी भास्कर मुदलियार की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और पार्टी ने उसे 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया।
जानिए, कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि भिलाई स्टील प्लांट से निकलने वाले फ्लू डस्ट में आयरन स्क्रैप मिलाकर उसे प्लांट से बाहर भेजा जाता था। बाहर पहुंचने के बाद स्क्रैप को अलग कर एके ट्रेडर्स समेत अन्य स्थानों पर जमा किया जाता था। पुलिस के अनुसार, फ्लाई ऐश और फ्लू डस्ट की आड़ में लंबे समय से यह अवैध कारोबार चल रहा था। आरोप है कि बीएसपी के तत्कालीन जनरल मैनेजर हिमांशु भूषण मलिक और असिस्टेंट जनरल मैनेजर मनोज कुमार देवांगन कथित रूप से लोहा चोरी करने वाले गिरोह के संपर्क में थे और प्लांट के भीतर से उनकी मदद कर रहे थे।


