टीआरपी डेस्क। बिहार की सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री आवास पर चली लंबी खींचतान और मंथन के बाद आखिरकार नीतीश कुमार ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी है। श्रवण कुमार को जदयू विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया है।

नीतीश के आवास पर हुआ फैसला

दरअसल, एक दिन पहले ही पटना में पूर्व सीएम नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर विधायकों की हाई-प्रोफाइल मीटिंग हुई थी। इस बैठक में मौजूद तमाम विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को अपना नेता चुनने का अधिकार दिया था। जिसके बाद आज श्रवण कुमार के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया गया।

कौन हैं श्रवण कुमार? क्यों जताया भरोसा?

बता दें कि श्रवण कुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के चाणक्य माने जाते हैं। वे नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से आते हैं और लगातार 8 बार से विधायक हैं। उन्होंने अपने सफर की शुरुआत जेपी आंदोलन से की थी और समता पार्टी के गठन में नीतीश का साथ दिया था। साल 1995 में जब समता पार्टी के महज 7 विधायक जीते थे, श्रवण कुमार उनमें से एक थे। वे बिहार सरकार में ग्रामीण विकास और परिवहन जैसे भारी-भरकम विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

समता पार्टी से जदयू तक का सफर

गौरतलब है कि श्रवण कुमार ने इंटर तक की पढ़ाई की और फिर पूरी तरह राजनीति में कूद पड़े। साल 2000 में जब समता पार्टी का विलय जदयू में हुआ, तब से लेकर आज तक वे पार्टी के सबसे वफादार सिपाही बने हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि वे नीतीश कुमार के साथ-साथ जीतन राम मांझी के कार्यकाल में भी कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।