Farmer forced to approach High Court: राजस्व अधिकारियों के आदेश के बाद भी पटवारी द्वारा जमीन का नामांतरण नहीं करने से परेशान एक किसान को आखिरकार छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले में नाराज हाई कोर्ट ने मुंगेली कलेक्टर को पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने और 7 दिन में नामांतरण करने का सख्त आदेश दिया है।

यह मुंगेली जिले के ग्राम दाड़गांव निवासी पवन कुमार भास्कर की जमीन का मामला था। किसान की संबंधित जमीन के कागजात के अवलोकन के बाद एसडीओ पथरिया ने 18 नवंबर 2024 को याचिकाकर्ता के पक्ष में नामांतरण का आदेश जारी किया। जिसके आधार पर नायब तहसीलदार ने 30 मई 2025 को पटवारी को राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने के निर्देश दिया। इस संबंध में ज्ञापन 10 जून 2025 को हल्का पटवारी नंबर 3, तहसील पथरिया को भी भेजा गया। आरोप है कि इन सब आदेशों के बावजूद महीनों तक पटवारी ने फाइल दबाकर रखी और नामांतरण की कार्रवाई नहीं की।

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हाई कोर्ट ने क्या कहा?

याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। हाई कोर्ट ने आदेशों के बावजूद कार्रवाई लंबित रखे जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने संबंधित पटवारी को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर 30 मई 2025 के नामांतरण आदेश और 10 जून 2025 के ज्ञापन का पालन सुनिश्चित करे। मुंगेली कलेक्टर को भी पूरे मामले की निगरानी करने और अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।

न मानने पर होगी कार्रवाई

कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय में नामांतरण नहीं हुआ या रिपोर्ट नहीं दी गई तो संबंधित पटवारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

FAQ – नामांतरण को लेकर हाई कोर्ट का आदेश

सवाल: मुंगेली के किसान को हाई कोर्ट क्यों जाना पड़ा?

ग्राम दाड़गांव के किसान पवन कुमार भास्कर का S.D.O. और नायब तहसीलदार के आदेश के बाद भी पटवारी ने जमीन का नामांतरण नहीं किया था। इसलिए उन्हें हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

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सवाल: हाई कोर्ट ने पटवारी को कितने दिन का समय दिया है?

हाई कोर्ट ने पटवारी को आदेश मिलने के 7 दिन के भीतर नामांतरण करने और 10 दिन में अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

सवाल: किस-किस जमीन का नामांतरण लंबित था?

खसरा नंबर 239/1 की 0.876 हेक्टेयर और खसरा नंबर 355/1 की 0.071 हेक्टेयर जमीन का नामांतरण लंबित था।

सवाल: अगर पटवारी आदेश नहीं मानता तो क्या होगा?

कोर्ट ने कहा है कि आदेश न मानने पर संबंधित पटवारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सवाल: इस मामले में कलेक्टर की क्या भूमिका होगी?

हाई कोर्ट ने मुंगेली कलेक्टर को पूरे मामले की निगरानी करने और अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों से समय पर कार्रवाई सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।