भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस की नई जिला अध्यक्षों की सूची सामने आने के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं, जहां कई वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं ने इस चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और गुटीय राजनीति से प्रेरित बताया है। सूची में पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि इससे पार्टी में समर्पित और संभावनाशील कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि यह चयन नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और गुटबाजी का परिणाम है, न कि संगठनात्मक मजबूती का। वहीं सत्ताधारी भाजपा ने भी तंज कसा है। इस मामले को लेकर बीजेपी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने X पर लिखा- कांग्रेस की जिलाध्यक्षों की सूची = गुटबाज़ी + पट्ठाबाज़ी + समकक्ष नेताओं को निपटाने की साजिश है। मध्यप्रदेश कांग्रेस की बहुप्रतीक्षित जिलाध्यक्षों की सूची देर से आई और दुरूस्त भी नहीं आई। यह सूची कांग्रेस संगठन नहीं, बल्कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की गुटबाजी और व्यक्तिगत स्वार्थ की पटकथा है।
कांग्रेस की सूची में-
▪️जीतू पटवारी जी ने अपने समकक्ष नेताओं को ठिकाने लगाने का नया हथियार बना लिया, जिला अध्यक्षी की कुर्सी।
▪️परिवारवाद और पट्ठावाद हावी निष्ठावान और संभावनाशील कार्यकर्ताओं की अनदेखी।
▪️दिग्विजय सिंह जी के सपनों के वारिस जयवर्धन सिंह जी को, जीतू पटवारी जी ने जिले तक सीमित कर दुविधा में डाल दिया।
▪️जब सेलेक्शन तय था तो इलेक्शन की नौटंकी क्यों?
▪️8 पूर्व विधायकों और कई पूर्व मंत्रियों को जिलाध्यक्ष बनाना बताता है कि कांग्रेस जनाधार खो चुके नेताओं को ही आगे बढ़ाना चाहती है।
▪️सतना में महिला अपराधों में घिरे विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को जिलाध्यक्ष बनाना कांग्रेस की सोच और चरित्र का प्रमाण है।
▪️हारने वाले नेताओं को जिले की कमान सौंपकर समर्पित कार्यकर्ताओं का अपमान किया गया।
▪️समाज और क्षेत्रीय संतुलन की अनदेखी जहाँ जातीय समीकरण बिगड़े और कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फेरा गया।
▪️विरोधी गुट के नेताओं को ठिकाने लगाने की कोशिश, नतीजा सूची आते ही कई जिलों में असंतोष और बगावत।
कांग्रेस का संगठन अब निर्माण का नहीं, बल्कि विनाश का प्रतीक बन चुका है। जहाँ कार्यकर्ता का हित और विचारधारा होनी चाहिए, वहाँ जीतू पटवारी जी ने गुटीय राजनीति, अपराधियों को संरक्षण और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को तरजीह दी है। इसीलिए मध्यप्रदेश की जनता कांग्रेस को नकार रही है और भाजपा पर भरोसा जता रही है।


