रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन-जायदाद के झगड़ों में फंसे किसानों और आम जनता के लिए बड़ी खुशखबरी निकलकर सामने आई है। प्रदेश की सरकार ने सालों पुरानी पेचीदा व्यवस्था को खत्म करते हुए छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद अब आपको जमीन के लिए संभाग मुख्यालयों और कमिश्नर कोर्ट के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है।

कमिश्नर कोर्ट का झंझट खत्म, अब कलेक्टर ही सुप्रीम

ग्राउंड से मिल रही जानकारी के मुताबिक, पहले अगर एसडीएम (SDM) स्तर पर आपका जमीन विवाद नहीं सुलझता था, तो अपील करने के लिए संभाग के कमिश्नर कार्यालय जाना पड़ता था। रायपुर, बिलासपुर या दुर्ग जैसे बड़े शहरों के चक्कर काटते-काटते लोगों के जूते घिस जाते थे। लेकिन अब नए संशोधन के तहत एसडीएम के फैसलों के खिलाफ सीधी अपील कलेक्टर कोर्ट में होगी। मतलब साफ है, अब फैसला आपके अपने जिले में ही होगा।

30 से 50 किलोमीटर की दौड़ से मिली मुक्ति

ग्रामीण इलाकों से हमारे सूत्रों ने बताया कि एक अदद पेशी के लिए ग्रामीणों को 30 से 50 किलोमीटर दूर शहर आना पड़ता था। पूरा दिन बस के धक्के खाने और कचहरी के चक्कर काटने में निकल जाता था। सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक से न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि वकीलों के खर्चों से भी राहत मिलेगी। खासकर उन किसानों के लिए यह राहत की बात है जो छोटे-छोटे विवादों के लिए सालों तक फाइलें लिए घूमते थे।

फाइलें दबाईं तो नपेंगे अफसर, तय हुई डेडलाइन

इस नए कानून की सबसे बड़ी बात जो जनता को जाननी जरूरी है, वो है सुनवाई की समय सीमा। अब अफसर फाइलों को दबाकर नहीं बैठ सकेंगे। जमीन विवाद के मामलों का निपटारा अब 30 से 90 दिन के अंदर करना अनिवार्य होगा। धारा 59 में संशोधन से औद्योगिक विकास की जमीनों को पुनर्मूल्यांकन से छूट मिलेगी। अफसरों की जवाबदेही तय कर दी गई है; अगर सुनवाई में देरी हुई तो उन पर कार्रवाई भी हो सकती है। प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे क्योंकि कानूनी प्रक्रिया अब तेज हो गई है। प्रशासन ने अब कमर कस ली है और कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नए कानून के हिसाब से मामलों की लिस्टिंग शुरू की जाए।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।