महिला आयोग ने भिलाई स्टील प्लांट को लगाई कड़ी फटकार

टीआरपी। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने सोमवार को रायपुर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान भिलाई स्टील प्लांट (BSP) और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। आयोग की 390वीं प्रदेश स्तरीय सुनवाई में कुल 31 प्रकरणों पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान आयोग ने बीएसपी प्रबंधन को अपने कर्मचारियों की अनैतिक गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए जमकर फटकार लगाई।


यह सुनवाई प्रदेश की उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो रसूखदार संस्थानों या पुलिसिया दबाव के कारण न्याय से वंचित हैं। बीएसपी जैसे बड़े संस्थान को जवाबदेह ठहराना और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार को पत्र लिखना यह दर्शाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दीधारी हो या किसी बड़े संयंत्र का कर्मचारी।

बीएसपी में ‘लिपापोती’ पर आयोग सख्त


सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया जहाँ भिलाई स्टील प्लांट का एक कर्मचारी दो महिलाओं के साथ अवैध संबंध रखकर अपनी पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण नहीं दे रहा था। आयोग ने पाया कि बीएसपी के अधिकारी सुनवाई में आश्वासन तो देते हैं, लेकिन बाद में ‘लॉ डिपार्टमेंट’ का बहाना बनाकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं। डॉ. नायक ने सख्त लहजे में कहा कि बीएसपी अपने पुरुष कर्मचारियों को बचाने का काम कर रही है, जिससे उनके परिवार भूखे मरने की कगार पर हैं। आयोग ने बीएसपी के शीर्ष अधिकारियों को इस लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाई।

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पुलिसिया ‘चक्रव्यूह’ और 4 माह का मासूम


एक अन्य गंभीर मामले में कबीरधाम जिले के थाना पिपरिया का मामला सामने आया। यहाँ एक आरक्षक और उसकी पत्नी (महिला आरक्षक) ने आपसी विवाद में अपने पड़ोसियों के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कराई। पुलिसिया मिलीभगत के कारण एक निर्दोष महिला और उसके 4 माह के मासूम बच्चे को 2 महीने तक जेल में रहना पड़ा। आयोग ने इसे अधिकारों का घोर उल्लंघन मानते हुए DGP छत्तीसगढ़ और पुलिस जवाबदेही प्राधिकार को एक माह के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने का आदेश दिया है।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले


भारत माला परियोजना: कोलिहापुरी की जमीन के 1.64 करोड़ रुपये के मुआवजे में आवेदिका को हिस्सा दिलाने के लिए कलेक्टर दुर्ग को बैंक खाता फ्रीज करने की अनुशंसा की गई।

संपत्ति विवाद: बरौंडा और कांपा की संयुक्त संपत्ति में विधवा महिला की दो बेटियों को हक दिलाने के निर्देश दिए गए।

पारिवारिक विवाद: बिना वैधानिक तलाक के पत्नी को घर से निकालने और भरण-पोषण न देने वाले पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी गई।

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आयोग ने कबीरधाम पुलिस के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच की अनुशंसा की है। साथ ही बीएसपी प्रबंधन से अपेक्षा की गई है कि वे अपने अनुशासन नियमों में बदलाव कर पीड़ित परिवारों को न्याय सुनिश्चित करें। आयोग इन सभी मामलों की अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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