Political parties and social organizations discussing the Uniform Civil Code and tribal rights in Chhattisgarh

CG News: UCC में आदिवासियों पर चर्चा, जानिए कांग्रेस क्यों कर रही विरोधछत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) यानि कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। इसे लेकर गुरुवार को कमेटी की बैठक आयोजित की गई। जिसमें अलग-अलग समाज संगठन से लेकर कर्मचारी संगठन कानूनविद सहित लगभग 200 से ज्यादा लोगों को बैठक में शामिल किया गया। बैठक का एकमात्र उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानून में किस तरह के प्रावधानों को लेकर लोगों से चर्चा की गई और उनकी सलाहों को सुना गया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सीधे तौर पर इसका विरोध कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने यूसीसी को सीधे तौर पर प्रदेश की 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी के खिलाफ बताया है और भाजपा, आरएसएस पर आदिवासियों के खिलाफ षड़यंत्र करने का आरोप लगाया है।

वहीं, UCC समिति के सदस्य और पूर्व IAS शत्रुघ्न सिंह का कहना है कि UCC लेकर समिति का काम लगातार जारी है। बैठक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानूनी प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है। साथ ही संविधान की 5वीं अनुसूची के क्षेत्रों को लेकर भी चर्चा की जा रही है। समिति इन क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों और उनके अनुरूप कानूनी प्रावधानों पर विचार कर रही है।

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5 सदस्यीय कमेटी का किया गया है गठन

UCC लागू करने के लिए प्रदेश सरकार ने 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। वहीं, बतौर सदस्य शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को शामिल किया गया है। जून में किए गए कमेटी के गठन के बाद कमेटी की पहली सार्वजनिक आयोजित की गई। जिसमें विभिन्न समाज वर्गों आदि के प्रमुखों को बुलाकर चर्चा की जा रही है।

समिति देगी सुझाव और सिफारिशें

कमेटी सबसे पहले छत्तीसगढ़ में वर्तमान कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी। इसके बाद शादी, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और परिवार से जुड़े अन्य कानूनों पर समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं का आकलन करेगी। समिति नागरिकों, सामाजिक संगठनों, कानून के जानकारों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव भी मांग रही है। इसके साथ ही उन राज्यों का भी अध्ययन करेगी, जहां समान नागरिक संहिता लागू है। इन सभी पहलुओं की स्टडी करने के बाद कमेटी अपना वाइड फॉर्मेट राज्य सरकार को सौंपेगी।

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आदिवासियों के अधिकारों का क्या होगा-कांग्रेस

कांग्रेस का कहना है कि राज्य में आदिवासियों को विशेष संवैधानिक संरक्षण मिला है। प्रदेश में पेसा कानून लगा है, पांचवी अनुसूची भी है। आदिवासियों के लिए राजस्व संहिता में विशेष प्रावधान है। विशेष संरक्षित जनजातियां भी है। यदि यूसीसी लागू हो गया तो इन अधिकारों का क्या होगा? सरकार स्पष्ट करे कि UCC से आदिवासियों को नुकसान होगा की नहीं। साथ ही कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में UCC की जरूरत को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

UCC जबरन थोपने का भी है आरोप

दीपक बैज ने सरकार पर जबरिया आदिवासियों पर UCC थोपने का आरोप लगाया है। राज्य में UCC लागू होने पर आदिवासियों के हितों और अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने UCC से आदिवासी समाज को बाहर रखने की भी मांग की है।

जानिए, संरक्षित जनजातियों को लेकर क्या है पेंच

छग राज्य में संरक्षित जनजातियों में बैगा, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया, पंडो शामिल हैं। जिन्हें विशेष रूप से संविधान में विशेष संरक्षण मिला है। ऐसे में क्या UCC लागू होने पर इनके अधिकारों के सुरक्षित रहने पर अभी संशय है। वहीं, भू-राजस्व संहिता में आदिवासियों के जमीनों के मालिकाना हक संबंधी नियमों में भी पेंच फंसा हुआ दिखाई दे रहा है।

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अब तक 5 राज्यों में हो चुका है लागू
उत्तराखंड
गोवा
गुजरात
असम
मध्यप्रदेश

रजनी सेन टीआरपी में लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरें लिखती हैं। उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी, खान-पान, फैशन, त्योहार, संस्कृति, ज्योतिष और बदलते लाइफस्टाइल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर लिखने का अनुभव है। उनका लेखन सरल, सहज और पाठकों से जुड़ा हुआ है। रजनी सेन ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की पढ़ाई की है और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी लेखन क्षमता के जरिए पाठकों तक उपयोगी और रोचक जानकारी पहुंचाने का प्रयास करती हैं।