CG Urban Administration Record: छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग ने वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग से ठीक पहले वो कर दिखाया है जो नामुमकिन लग रहा था। दरअसल, विभाग ने महज 48 घंटों के भीतर केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग की 404.66 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। रायपुर के मंत्रालय से लेकर जिलों के नगर निगमों तक इस मिशन मोड वर्किंग की चर्चा हो रही है।
30 मार्च को शुरू हुआ खेल
ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, सारा एक्शन 30 मार्च को शुरू हुआ जब भारत सरकार से पहली किश्त के रूप में 202.33 करोड़ रुपये राज्य को मिले। अमूमन सरकारी फाइलों को खिसकने में हफ्तों लगते हैं, लेकिन उप मुख्यमंत्री अरुण साव के सख्त निर्देश थे कि एक-एक पैसा निकायों तक पहुंचना चाहिए।
24 घंटे में ट्रेजरी से ट्रांसफर तक
बता दें कि विभाग के अधिकारियों ने गजब की फुर्ती दिखाई। मात्र 24 घंटे के भीतर ट्रेजरी से राशि निकाली गई। सभी नगरीय निकायों के खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया। तुरंत ग्रांट ट्रांसफर सर्टिफिकेट (GTC) तैयार कर केंद्र को भेजा गया।
तालमेल ने दिलाई दूसरी किश्त
गौरतलब है कि GTC समय पर पहुंचने की वजह से केंद्र सरकार का आवासन, शहरी कार्य और वित्त मंत्रालय भी प्रभावित हुआ। बेहतर समन्वय का नतीजा यह रहा कि बिना किसी देरी के 202.33 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त भी तुरंत मंजूर कर दी गई। इस तरह कुल 404.66 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ के खाते में आ गए।
अब शहरों में दिखेगी विकास की रफ्तार
इस भारी फंड के आने से प्रदेश के निकायों में रुके हुए काम अब दौड़ेंगे। संभावना है कि रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और जगदलपुर जैसे बड़े शहरों के रुके हुए प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे।
इस फंड का सीधा असर छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों पर पड़ेगा। नगर निगमों के पास फंड की कमी की वजह से जो छोटे-छोटे काम रुके थे, उन्हें अब तुरंत मंजूरी मिलेगी। अफसरों की इस फुर्ती ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी सिस्टम भी प्राइवेट सेक्टर की तरह तेज काम कर सकता है। अब जनता को उम्मीद है कि जिस रफ्तार से पैसा आया है, उसी रफ्तार से वार्डों में काम भी दिखेगा।


