PSC issues clarification State Service Exam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 के प्रश्नपत्रों के पुनर्मूल्यांकन की मांग पर बड़ी सफाई दी है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को आयोग ने भ्रामक बताया है।
आयोग ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया विज्ञापन में जारी विज्ञापन के अनुसार ही चल रही है। दरअसल हर प्रश्नपत्र में न्यूनतम 33% अंक लाना अनिवार्य है। कई अभ्यर्थी यह अंक नहीं ला पाए, इसलिए परिणाम प्रभावित हुआ और 795 की जगह केवल 608 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू के लिए चयनित हुए।
पुनर्मूल्यांकन क्यों नहीं होगा?
आयोग ने विज्ञापन की कंडिका 11(v) का हवाला देते हुए कहा कि आयोजित परीक्षाओं में पुनर्मूल्यांकन तथा पुनर्गणना का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए किसी प्रश्न-पत्र के संबंध में पुनर्मूल्यांकन अथवा पुनर्गणना की प्रक्रिया संभव नहीं है।
उत्तर पुस्तिका की कॉपी ले सकेंगे
आयोग ने कहा कि सभी लिखित परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य अत्यंत गोपनीयता एवं निष्पक्षता के साथ विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से कराया जाता है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में प्रत्येक उत्तर पुस्तिका को उत्तर पुस्तिका क्रमांक से अलग करते हुए विषय-विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराया जाता है। पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और निर्धारित नियमों एवं निर्देशों के तहत संचालित होती है।
चयन परिणाम के बाद प्रारंभिक-मुख्य के अंक, मेरिट सूची और कट-ऑफ वेबसाइट पर आएगी। अभ्यर्थी आवेदन क्रमांक और जन्मतिथि से अंक देख सकेंगे, उत्तर पुस्तिका की कॉपी भी ले सकेंगे।
आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की – भ्रामक सूचनाओं से बचें, आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल 1. क्या राज्य सेवा परीक्षा 2025 का पुनर्मूल्यांकन होगा?
जवाब: नहीं, PSC ने स्पष्ट किया विज्ञापन की कंडिका 11(v) में इसका कोई प्रावधान नहीं है।
सवाल 2. 795 की जगह 608 अभ्यर्थी ही क्यों चयनित हुए?
जवाब: क्योंकि हर पेपर में 33% न्यूनतम अंक जरूरी है, कई अभ्यर्थी इसे हासिल नहीं कर पाए।
सवाल 3. सोशल मीडिया पर क्या चर्चा चल रही थी?
जवाब: कुछ पेपरों के पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना की मांग, जिसे PSC ने भ्रामक बताया।
सवाल 4. अभ्यर्थी अपने अंक कैसे देख सकेंगे?
जवाब: चयन परिणाम के बाद वेबसाइट पर मेरिट और कट-ऑफ जारी होगी, आवेदन क्रमांक और जन्मतिथि से अंक देख सकेंगे।
सवाल 5. मूल्यांकन कैसे होता है?
जवाब: अत्यंत गोपनीयता से, उत्तर पुस्तिका क्रमांक हटाकर विषय-विशेषज्ञों द्वारा।


