छत्तीसगढ़ रेरा का बिल्डर्स पर कड़ा एक्शन

टीआरपी। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने गृह क्रेताओं (होम बायर्स) के हितों की रक्षा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रमोटर को सिंकिंग फंड की पूरी राशि और कॉमन एरिया का प्रबंधन तत्काल सहकारी आवासीय सोसायटी को हस्तांतरित करने का सख्त निर्देश दिया है। रेरा ने यह ऐतिहासिक फैसला दुर्ग जिले के ग्राम अमलेश्वर में स्थित पंजीकृत आवासीय परियोजना ‘हर्षित नियोज सिटी’ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में निवासियों के पक्ष में सुनाया है।

यह फैसला छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रमोटरों की वैधानिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और बाजार में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक नजीर साबित होगा। इस आदेश से न केवल हर्षित नियोज सिटी के निवासियों को बड़ी राहत मिली है, बल्कि प्रदेश के उन हजारों होम बायर्स को भी संबल मिलेगा जो फ्लैट या मकान खरीदने के बाद बिल्डर्स की मनमानी और मेंटेनेंस फंड के ट्रांसफर की समस्या से जूझ रहे हैं।

प्रमोटर की मनमानी पर लगी रोक, रेरा का कड़ा रुख

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यह पूरा मामला तब सामने आया जब ‘हर्षित नियोज सिटी रेसिडेन्शियल को-ऑपरेटिव सोसायटी मर्यादित’ ने परियोजना के प्रमोटर सिंघनिया बिल्डॉन प्रा.लि. एवं मेसर्स हर्षित सिंघानिया बिल्डॉन के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। सोसायटी ने अपनी शिकायत में साझा सुविधाओं के संचालन में अनियमितता, सिंकिंग फंड की राशि का ट्रांसफर न होने और साझा क्षेत्रों (कॉमन एरिया) को सुपुर्द न किए जाने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए थे।

मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद CGRERA ने प्रमोटर की जवाबदेही तय की। प्राधिकरण ने रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 17 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट पूरा होते ही कॉमन एरिया का स्वामित्व आवंटियों की सोसायटी को सौंपना बिल्डर का वैधानिक दायित्व है। रेरा ने आदेश दिया कि प्रमोटर द्वारा फ्लैट/इकाईधारकों से संकलित की गई सिंकिंग फंड की संपूर्ण राशि को नियमानुसार तुरंत सोसायटी के खाते में ट्रांसफर किया जाए, क्योंकि इस निधि पर सिर्फ निवासियों का हक है।

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प्रभावित परियोजना: दुर्ग जिले के ग्राम अमलेश्वर स्थित ‘हर्षित नियोज सिटी’ आवासीय परियोजना पर आया फैसला।

विवादित पक्ष: ‘हर्षित नियोज सिटी रेसिडेन्शियल को-ऑपरेटिव सोसायटी मर्यादित’ बनाम सिंघनिया बिल्डॉन प्रा.लि.।

कानूनी आधार: रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 17 के तहत कॉमन एरिया और अधिकारों को ट्रांसफर करने के निर्देश।

इस समयबद्ध हस्तांतरण आदेश के बाद अब परियोजना के वास्तविक हितधारकों (निवासियों) को अपने परिसर के रखरखाव और संचालन संबंधी फैसलों में पूरा अधिकार और वित्तीय नियंत्रण हासिल होगा। यदि प्रमोटर तय समय सीमा के भीतर फंड और कॉमन एरिया ट्रांसफर नहीं करता है, तो रेरा के नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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