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दिवाली में संभलकर हर 6 में से 1 खाने का सैंपल फेल; 83 लाख रुपए का जुर्माना, फिर भी 15 दिन में कैसे खुल जाते हैं मिलावटी रेस्टोरेंट?

Food safety officers inspecting sweets and food items during festive season
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Food Adulteration in Chhattisgarh: दिवाली पर घरों में मिठाइयों की खुशबू और बाजारों में नमकीन की खरीदारी के बीच खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
  • छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में इस साल अक्टूबर तक हर छह में से एक खाद्य नमूना अमानक मिला है।
  • पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले अमानक नमूनों का अनुपात दोगुने से ज्यादा हो गया है।
  • मिलावट और गुणवत्ता से खिलवाड़ के मामलों में विभाग ने दो वित्तीय वर्षों में 1102 केस दर्ज किए और 83 लाख रुपए से अधिक जुर्माना लगाया, लेकिन स्थायी रूप से सिर्फ एक प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द हुआ।

Food Adulteration in Chhattisgarh: दिवाली पर घरों में मिठाइयों की खुशबू और बाजारों में नमकीन की खरीदारी के बीच खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में इस साल अक्टूबर तक हर छह में से एक खाद्य नमूना अमानक मिला है। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले अमानक नमूनों का अनुपात दोगुने से ज्यादा हो गया है। मिलावट और गुणवत्ता से खिलवाड़ के मामलों में विभाग ने दो वित्तीय वर्षों में 1102 केस दर्ज किए और 83 लाख रुपए से अधिक जुर्माना लगाया, लेकिन स्थायी रूप से सिर्फ एक प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द हुआ।

बिलासपुर के हरी चटनी रेस्टोरेंट का लाइसेंस करीब तीन महीने पहले स्थायी रूप से रद्द किया गया था। जांच में सामने आया कि संचालक ने किराना दुकान के नाम पर लाइसेंस लिया था, लेकिन उसी लाइसेंस पर रेस्टोरेंट चला रहा था। इसके अलावा प्रतिष्ठान में साफ-सफाई की स्थिति भी खराब मिली थी। इन अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने लाइसेंस निरस्त कर दिया। पिछले दो वित्तीय वर्षों में स्थायी लाइसेंस निरस्तीकरण का यह एकमात्र मामला है। वहीं, करीब 20 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस 3 से 15 दिन के लिए सस्पेंड किए गए। यानी गड़बड़ी मिलने पर कुछ दिनों की बंदी और जुर्माने के बाद कारोबार फिर शुरू करने का रास्ता खुल गया।

हर छह में से एक खाद्य नमूना जांच में फेल

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर इस साल के जांच आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खाद्य सुरक्षा विभाग ने करीब 2950 नमूनों की जांच की थी। इनमें 214 नमूने अमानक पाए गए। इस तरह कुल जांच में अमानक नमूनों की हिस्सेदारी 7.3 प्रतिशत रही। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अक्टूबर तक करीब 1100 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें से 180 नमूने फेल मिले। इस बार अमानक नमूनों का अनुपात बढ़कर 16.4 प्रतिशत हो गया। यानी पिछले पूरे वित्तीय वर्ष के मुकाबले चालू वर्ष में अब तक अमानक नमूनों की हिस्सेदारी दोगुने से अधिक है। हालांकि, दोनों अवधियों में जांच की संख्या और समय अलग-अलग है।

दो वित्तीय वर्षों में 1102 मामले दर्ज

खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में खाद्य पदार्थों में गड़बड़ी को लेकर 530 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अक्टूबर तक ही 572 मामले सामने आ चुके हैं। इस तरह दो वित्तीय वर्षों में कुल 1102 मामले दर्ज हुए। जुर्माने की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 75 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया गया। दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर यह राशि 83 लाख रुपए से ज्यादा है। इसके बावजूद स्थायी लाइसेंस निरस्तीकरण का आंकड़ा एक ही रहा।

लाइसेंस सस्पेंड और रद्द करने में क्या है अंतर?

लाइसेंस निलंबित होने पर संबंधित प्रतिष्ठान को विभाग की ओर से तय अवधि तक कारोबार बंद रखना पड़ता है। यह अवधि 3 से 15 दिन तक हो सकती है। दूसरी ओर, लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द होने के बाद प्रतिष्ठान उस लाइसेंस के आधार पर कारोबार नहीं कर सकता। गंभीर अनियमितता या सुधार नहीं होने की स्थिति में सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के बाद लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों में करीब 20 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस कुछ दिनों के लिए निलंबित किए गए, जबकि स्थायी रूप से केवल एक का लाइसेंस रद्द हुआ।

10 महीने बाद भी नहीं सुधरी सफाई, ब्रेड बनाने की जगह मिले चूहे

खाद्य प्रतिष्ठानों में लापरवाही का एक मामला रायपुर की समता कॉलोनी स्थित ब्रेड बास्केट का भी है। दिसंबर 2025 में खाद्य विभाग की जांच के दौरान यहां गंदगी मिलने पर व्यवस्था सुधारने की चेतावनी दी गई थी। करीब 10 महीने बाद दोबारा जांच की गई तो हालात में सुधार नहीं मिला। ब्रेड बनाने की जगह चूहे घूमते हुए मिले। इसके अलावा पेस्ट कंट्रोल का रिकॉर्ड और कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं थे। पहले चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रतिष्ठान में जरूरी सुधार नहीं किए गए थे।

खाद्य पदार्थों में मिलावट मिले तो कहां करें शिकायत?

खाद्य पदार्थों में मिलावट, खराब गुणवत्ता, एक्सपायरी उत्पाद या होटल-रेस्टोरेंट में गंदगी मिलने पर छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा विभाग के हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर शिकायत की जा सकती है। इस नंबर पर कॉल या वाट्सएप के जरिए जानकारी दी जा सकती है। शिकायत करते समय दुकान या रेस्टोरेंट का नाम और पता, संबंधित खाद्य पदार्थ का विवरण और उपलब्ध बिल या फोटो साझा करना उपयोगी होगा।

खाद्य पदार्थ खरीदते समय उपभोक्ता बरते ये सावधानियां

  • खरीदारी के समय बिल जरूर लें और उसे संभालकर रखें।
  • पैकेट पर निर्माण और एक्सपायरी तारीख जांचें।
  • खराब गंध, रंग या स्वाद वाला खाद्य पदार्थ न खाएं।
  • गड़बड़ी मिलने पर उत्पाद और प्रतिष्ठान की जानकारी के साथ शिकायत करें।
  • संभव हो तो शिकायत के साथ बिल और फोटो भी उपलब्ध कराएं।

क्या हैं लाइसेंस रद्द करने के नियम

खाद्य नियंत्रक दीपक अग्रवाल के मुताबिक, खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच तीन श्रेणियों में की जाती है। इनमें अनसेफ, मिस ब्रांडेड और सब-स्टैंडर्ड शामिल हैं। हर मामले में लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान नहीं है। कई मामलों में जुर्माना लगाया जाता है। अनसेफ पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान को नोटिस देकर जवाब देने का मौका दिया जाता है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत जुर्माने और सजा का प्रावधान है। किसी उत्पाद के लगातार तीन बार अनसेफ पाए जाने पर लाइसेंस रद्द किया जाता है। खाद्य नियंत्रक के अनुसार, लैब की जांच व्यवस्था सख्त की गई है। नमूनों की जांच में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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