Chhattisgarh Gazette Notification Document Copy for New Law
The official notification of freedom of religion act published in Chhattisgarh gazette.

CG News : छत्तीसगढ़ में गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। राज्य शासन ने पूरे प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 को पूरी तरह से प्रभावी कर दिया है। इस कानून के लागू होते ही अब धोखे से धर्म बदलने वालों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।

राजपत्र में इस कानून का प्रकाशन होने के बाद से पुलिस और प्रशासन को विशेष शक्तियां मिल गई हैं। यही वजह है कि अब प्रदेश में किसी भी नागरिक को डराकर या लालच देकर धर्म बदलने पर सीधे जेल जाना होगा। नए नियमों के तहत सजा की अवधि को पहले के मुकाबले काफी कड़ा कर दिया गया है।

सामूहिक धर्मांतरण पर अब सीधे आजीवन कारावास

इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति बलपूर्वक या धोखाधड़ी से सामूहिक धर्मांतरण कराता है, तो उसे सख्त सजा दी जाएगी। अदालत ऐसे दोषियों को अब सीधे आजीवन कारावास तक की सजा सुना सकती है। इसके साथ ही दोषियों पर 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

पीड़ित के आधार पर तय होगी सजा की अवधि

अगर धर्म परिवर्तन की शिकार कोई महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST/OBC) वर्ग का व्यक्ति होता है, तो कानून और अधिक सख्त हो जाएगा। इस स्थिति में दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 साल से लेकर अधिकतम 20 साल तक की जेल हो सकती है। सामान्य मामलों में भी अब 7 से 10 साल की सजा के साथ कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया है।

शादी के लिए धर्म बदला तो विवाह माना जाएगा शून्य

अक्सर देखा गया है कि सिर्फ शादी करने के उद्देश्य से लोग अपना मूल धर्म बदल लेते हैं। नए अधिनियम में इस पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। अब केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन पूरी तरह अमान्य होगा और उस शादी को शून्य घोषित कर दिया जाएगा।

कलेक्टर को 60 दिन पहले देनी होगी लिखित सूचना

यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से भी अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे अब एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने की तारीख से कम से कम 60 दिन पहले जिले के कलेक्टर को लिखित रूप में सूचना देनी होगी। बिना जिला प्रशासन की पूर्व अनुमति के किया गया कोई भी धर्म परिवर्तन अवैध माना जाएगा।

जिलों में बनेंगी विशेष अदालतें, 6 महीने में आएगा फैसला

धर्मांतरण के इन संवेदनशील मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए सरकार हर जिले में विशेष अदालतें गठित करने जा रही है। इन अदालतों के लिए एक समय सीमा भी तय की गई है। किसी भी मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद कोर्ट को 6 महीने के भीतर अपनी सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाना होगा। इससे पीड़ितों को न्याय के लिए सालों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • सामान्य मामलों में गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर क्या सजा है?
    सामान्य मामलों में बल या लालच से धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल की सजा और 5 लाख रुपये जुर्माने का नियम है।
  • सामूहिक धर्मांतरण कराने वाले दोषियों के लिए क्या कानूनी प्रावधान हैं?
    सामूहिक रूप से गैरकानूनी ढंग से धर्म बदलने वाले दोषियों को आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • अपनी मर्जी से धर्म बदलने के लिए प्रशासन को कितने दिन पहले बताना होगा?
    इच्छुक व्यक्ति को धर्म परिवर्तन की निर्धारित तिथि से कम से कम 60 दिन पहले जिले के कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य है।
  • क्या सिर्फ शादी के लिए किए गए धर्म परिवर्तन को कानूनी मान्यता मिलेगी?
    नहीं, नए कानून के तहत सिर्फ विवाह के उद्देश्य से किए गए धर्म परिवर्तन के बाद उस शादी को अदालत द्वारा शून्य घोषित किया जा सकेगा।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।