Chhattisgarh High Court pension case involving widow Baagin Bai
सर्विस बुक गुम होने के कारण वर्षों तक पेंशन के लिए भटकती रही बैगीन बाई को हाईकोर्ट से राहत मिली।

Major High Court Ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी वयस्क महिला के स्वेच्छा से सेक्स वर्क में शामिल होने को मात्र इसी आधार पर अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने रायपुर के तेलीबांधा थाने में दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और संबंधित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

याचिकाकर्ता महिला ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह रायपुर के होटल हयात में पुलिस कार्रवाई के दौरान मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे थाने बुलाकर मामले में फंसा दिया और गिरफ्तार कर लिया।

बाद में रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसे जमानत दे दी थी। महिला का आरोप था कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल न करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उसके और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी गई।

कोर्ट ने क्या कहा ?

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि महिला के खिलाफ Immoral Traffic (Prevention) Act के तहत कोई ठोस आरोप या सामग्री नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ “सेक्स वर्कर होने” के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं है।

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फैसले में पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2022 के बुद्धदेव कर्मास्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले का हवाला दिया। उसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि सेक्स वर्कर्स भी कानून के समान संरक्षण की हकदार हैं और वयस्क महिला द्वारा सहमति से किया जा रहा सेक्स वर्क अपराध नहीं है।

अंतिम आदेश

हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2023 के अंतरिम आदेश को अंतिम आदेश में शामिल करते हुए महिला के खिलाफ दर्ज FIR, चार्जशीट और लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

FAQ: महिला सेक्स वर्कर का मामला 

सवाल: हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

कोर्ट ने कहा कि वयस्क महिला का स्वेच्छा से सेक्स वर्क करना अपराध नहीं है और तेलीबांधा थाने की FIR रद्द की।

सवाल: महिला पर क्या आरोप था?

आरोप था कि वह होटल हयात में पुलिस कार्रवाई के दौरान मौजूद थी, लेकिन महिला ने इसे नकारा।

सवाल: कोर्ट ने किस सुप्रीम कोर्ट फैसले का हवाला दिया?

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19 मई 2022 के बुद्धदेव कर्मास्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले का, जिसमें कहा गया था सेक्स वर्कर्स को भी समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।

सवाल: FIR किन धाराओं में थी?

Immoral Traffic (Prevention) Act के तहत मामला दर्ज था।

सवाल: इस फैसले का महत्व क्या है?

यह फैसला सेक्स वर्कर्स के अधिकारों और कानून के समान संरक्षण को लेकर अहम है।