बिलासपुर हाईकोर्ट
बिलासपुर हाईकोर्ट

टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से IPS रजनेश सिंह और अरविंद कुजूर सहित 6 पुलिस अफसरों को राहत मिल गई है। अफसरों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित EE आलोक अग्रवाल के भाई पवन अग्रवाल ने याचिका लगाई थी। जिसके बाद CJM कोर्ट के आदेश पर बिलासपुर के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज की गई थी।

बता दें कि मामले की सुनवाई जस्टिस आरसीएस सामंत की एकल खंडपीठ में हुई। IPS रजनेश सिंह, SP अरविंद कुजूर, DSP अशोक जोशी, अजितेश सिंह, TI संजय देवस्थले व लगरेरू खेस ने अधिवक्ता अनिल पिल्लई, अनुपम दुबे व रोहित शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका प्रस्तुत की थी। मामला 2014 का है, जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन अभियंता (EE) आलोक अग्रवाल के ठिकानों पर ACB ने छापे मारे थे। इसे लेकर EE अग्रवाल के भाई पवन अग्रवाल ने CJM कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था।

परिवाद में अफसरों का उत्तरवादी के रूप में जिक्र

CJM कोर्ट ने सिविल लाइंस थाने में अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज करने के आदेश दे दिए। परिवाद में अफसरों को उत्तरवादी के रूप में जिक्र किया गया था। इस संशय के आधार पर दर्ज FIR को चलने योग्य न बताते हुए कार्रवाई रोकने की मांग की गई। साथ ही अधीनस्थ कोर्ट के आदेश को विधि सम्मत न होने के आधार पर खारिज किए जाने की भी अपील की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से FIR की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।