रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में सजा काट रहे बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के बीच एक ऐतिहासिक एमओयू (MOU) साइन किया गया है। इस समझौते के तहत जेल से रिहा होने वाले उन कैदियों को स्वरोजगार के लिए बैंक लोन दिया जाएगा, जिन्होंने जेल के भीतर कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
यह पहल छत्तीसगढ़ में अपराध दर को कम करने और पूर्व कैदियों के पुनर्वास में मील का पत्थर साबित होगी। अक्सर सामाजिक और आर्थिक बाधाओं के कारण पूर्व बंदी फिर से अपराध की ओर मुड़ जाते हैं, लेकिन अब बैंक से मिलने वाली आर्थिक मदद उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने और अपना खुद का कारोबार शुरू करने का मौका देगी।
रायपुर सहित प्रदेश की लगभग सभी जेलों में कैदियों के लिए अलग-अलग ट्रेड में कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। नए समझौते के अनुसार, इंडियन ओवरसीज बैंक इन प्रशिक्षित कैदियों की पात्रता की जांच करेगा और उन्हें अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए आसान किश्तों पर लोन उपलब्ध कराएगा।
जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल से छूटने के बाद कैदियों को सबसे बड़ी चुनौती फंड जुटाने में आती है, क्योंकि बैंक आसानी से उन्हें कर्ज नहीं देते। इस एमओयू के बाद यह कानूनी और प्रक्रियात्मक बाधा दूर हो जाएगी।
इस एमओयू के बाद अब जेल प्रशासन उन कैदियों की सूची तैयार करेगा जो अपनी सजा पूरी करने वाले हैं और जिनके पास हुनर है। आने वाले महीनों में रायपुर और अन्य जिलों के पात्र हितग्राहियों को बैंक के माध्यम से ऋण वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


