रायपुर। स्कूल आ पढैबर, जिनगी ला गढैबर जैसे नारे उस वक्त बेमानी लगने लगे, जब विधानसभा थाना क्षेत्र के सुड्डू से 26 बाल मजदूरों को रेस्क्यू किया गया है। इन बच्चों से यहां की पारले कंपनी में बिस्कुट बनाने का काम लिया जा रहा था।

भला हो बाल सुरक्षा टॉस्कफोर्स का जिसने छापामार कर उनको वहां से रेस्क्यू किया। ये कार्रवाई कलेक्टर एस भारतीदासन के निर्देश पर की गई। इसको लेकर टीआरपी की टीम ने तमाम लोगों से बात की।

निरंतर जारी रहेगी कार्रवाई: कलेक्टर

कलेक्टर भारतीदासन ने टीआरपी से कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग जैसे तमाम विभागों को इसके लिए निर्देशित किया गया है। बाल मजदूरी को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जो भी बाल मजदूरी करवाता हुआ पाया जाएगा उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इन संस्थाओं को शंका के आधार पर अथवा सूचना मिलने पर छापा मरने का निर्देश दिया गया है। ये कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

जांच की जा रही है होगी कार्रवाई: प्रभा दुबे

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष प्रभा दुबे ने कहा कि बच्चों के खाने का बिस्कुट भी बच्चों से बनवाया जा रहा है? ये बेहद निंदनीय कार्य है। इस मामले की जांच की जा रही है।

इसमें नियोक्ता पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा श्रम विभाग, महिला एवं बाल विभाग को चाहिए कि वे लगातार कार्रवाई जारी रखें। जहां भी शिकायत मिलती है वहां छापामर कर बच्चों को रेस्क्यू करें। इसकी सूचना भी जिम्मेदार अधिकारियों को दें वे कार्रवाई करेंगे।

बाल सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार का हो पालन: सुशील आनंद

कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बाल सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार का कड़ाई से पालन होना चाहिए। शासकीय शालाओं की कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल जाएं।

तो वहीं कल-कारखानों की श्रम विभाग लगातार मॉनिटरिंग करे। इस बात की पूरी निगरानी रखी जाए कि कल-कारखानों में बाल मजदूर न हों। इसके बावजूद भी जो लोग बाल श्रम करवाते हुए मिलें उनके ऊपर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

विभागों के पास इच्छाशक्ति की कमीं: ममता शर्मा

सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा ने कहा कि यूं तो सरकार के पास तमाम सारे विभाग हैं, इसके बावजूद भी बाल मजदूरी बदस्तूर जारी है। सरकार ने श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग जैसे विभाग बनाए हैं।

इसके बावजूद भी बाल मजदूरों का कल-कारखानों में पाया जाना दुखद तो है ही इन विभागों के अधिकारियों की कमजोर इच्छाशक्ति को भी दर्शाता है। छोटी-मोटी इंडस्ट्रीज पर छापामार कर विभाग के लोग अपनी पीठ- साल दो साल में अक्सर ठोकते रहते हैं। ऐसे संस्थानों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए।

संस्थान चाहे छोटे हों या बड़े अगर वहां चाइल्ड लेबर मिलता है तो उनके ऊपर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति हो। अगर वो जांच में दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई जरूर हो।

 

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।