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Chitrotpala Film City: फिल्म सिटी या जंगल की बलि? 1,100 पौधे लगाने का दावा, मौके पर मिले सिर्फ इतने; अब जन आंदोलन की तैयारी

Chitrotpala Film City: फिल्म सिटी या जंगल की बलि? 1,100 पौधे लगाने का दावा, मौके पर मिले सिर्फ इतने; अब जन आंदोलन की तैयारी
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Chitrotpala Film City: नवा रायपुर के तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण को लेकर अब जंगल बचाने की लड़ाई तेज होने जा रही है।
  • फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई के विरोध में माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने आंदोलन को जन आंदोलन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
  • समिति ने भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
  • विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें फिल्म सिटी के निर्माण से आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए दशकों पुराने पेड़ों को काटना उचित नहीं है।

Chitrotpala Film City: नवा रायपुर के तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण को लेकर अब जंगल बचाने की लड़ाई तेज होने जा रही है। फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई के विरोध में माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने आंदोलन को जन आंदोलन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। समिति ने भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें फिल्म सिटी के निर्माण से आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए दशकों पुराने पेड़ों को काटना उचित नहीं है। दूसरी ओर, पौधरोपण को लेकर भी सवाल उठे हैं। समिति के एक सदस्य ने दावा किया है कि 1,100 पौधे लगाने की बात कही गई थी, जबकि मौके पर गिनती के दौरान 530 पौधे ही मिले और वे भी सूखे हुए थे।

विकास के नाम पर जंगल क्यों काटें, दूसरी जगह बने फिल्म सिटी

नवा रायपुर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष सुजीत कुमार घिदौड़े ने कहा कि जंगल के पेड़ों की कटाई किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध सरकार की विकास योजनाओं या चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से नहीं है। आपत्ति परियोजना के लिए चुनी गई जगह को लेकर है। समिति का मानना है कि यदि परियोजना के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध है, तो उस पर विचार किया जाना चाहिए। इससे फिल्म सिटी के निर्माण का रास्ता भी निकल सकता है और पुराने पेड़ों को बचाने की कोशिश भी की जा सकती है।

1,100 पौधे लगाने का दावा, लेकिन लगे 530

फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई के बीच पौधरोपण को लेकर भी विवाद सामने आया है। माना-तूता जंगल संघर्ष समिति के सदस्य कृणाल सिन्हा ने दावा किया कि पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक की ओर से 1,100 पौधे लगाए जाने की बात कही गई है, लेकिन उनके अनुसार मौके पर गिनती करने पर केवल 530 पौधे मिले। सिन्हा का दावा है कि मौके पर मिले पौधे भी सूख चुके थे। उन्होंने बताया कि ये पौधे पर्यटन मंडल की बाउंड्री और प्रस्तावित फिल्म सिटी की बाउंड्री के बीच लगाए गए थे। हालांकि, पौधों की संख्या और उनकी मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

गांधी जयंती पर लगाए गए थे करीब 1,000 पौधे

माना-तूता में प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी परिसर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर पौधरोपण अभियान चलाया गया था। इस दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारियों ने करीब 1,000 पौधे लगाए थे। उस समय टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा था कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण के अनुकूल विकसित किया जाएगा। परिसर में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और उनके जीवित रहने की व्यवस्था करने की बात भी कही गई थी।

30 से 40 साल पुराने पेड़ों को काट रहे

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, चित्रोत्पला फिल्म सिटी का निर्माण करीब 100 एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आशंका है। ग्रामीणों का दावा है कि जंगल में काटे जा रहे कई पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने पेड़ों को तैयार होने में दशकों लग जाते हैं। ऐसे में उनकी कटाई से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई केवल नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि फिल्म सिटी के लिए वैकल्पिक जमीन तलाशना अधिक उचित होगा।

अब जन आंदोलन की तैयारी

माना-तूता जंगल संघर्ष समिति अब इस मुद्दे को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। समिति का कहना है कि आने वाले दिनों में आंदोलन को तेज किया जाएगा और जंगल की कटाई रोकने के लिए जनसमर्थन जुटाया जाएगा।

Nikhil Singh
लेखक / पत्रकार:

Nikhil Singh

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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