CG Civil Judge Exam Postponed: सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पदों पर होने वाली सीमित प्रतियोगी परीक्षा को हाईकोर्ट ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा 20 सितंबर को प्रस्तावित थी। परीक्षा स्थगित किए जाने के बाद अब अभ्यर्थियों को नई तारीख के लिए हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार करना होगा। परीक्षा स्थगित करने के पीछे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु से जुड़ा मामला प्रमुख वजह बताया गया है। इस संबंध में राज्य शासन के स्तर पर निर्णय लंबित है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का विषय फिलहाल राज्य शासन के समक्ष विचाराधीन है। इसी स्थिति को देखते हुए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की सीमित प्रतियोगी परीक्षा को अगले आदेश तक टालने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले का सीधा असर उन न्यायिक अधिकारियों और अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो निर्धारित परीक्षा के जरिए सीनियर डिवीजन के पदों पर आगे बढ़ने की प्रक्रिया में शामिल होने वाले थे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है मामला
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन मामले में 5 अगस्त को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर तेजी से विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 60 वर्ष की मौजूदा सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 62 वर्ष करने या अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 61 वर्ष करने के प्रस्ताव पर संबंधित हाईकोर्ट के साथ समन्वय कर निर्णय लेने को कहा है।
अनुभवी जजों की सेवाएं जारी रखने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के मामले में राज्य सरकारों की ओर से बताए गए आर्थिक बोझ के तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं को जारी रखना कई मामलों में नई नियुक्ति, प्रशिक्षण और पेंशन से जुड़े खर्च की तुलना में अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
अब नई तारीख का इंतजार
फिलहाल 20 सितंबर को होने वाली सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की सीमित प्रतियोगी परीक्षा स्थगित है। हाईकोर्ट की ओर से नई परीक्षा तारीख घोषित किए जाने तक अभ्यर्थियों को इंतजार करना होगा। परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वे हाईकोर्ट की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर बनाए रखें। नई तारीख और आगे की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी हाईकोर्ट के अगले आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।


