हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

बिलासपुर। हाईकोर्ट से एक ऐसा फैसला आया है जिसने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। अब परिवार में किसी एक के सरकारी नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा का दावा खारिज नहीं होगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने साफ कह दिया कि अधिकारियों को दफ्तर में बैठकर सिर्फ तकनीकी नियम नहीं झाड़ना चाहिए, बल्कि जमीन पर जाकर परिवार की असली लाचारी देखनी होगी।

अदालत ने अंबिकापुर नगर निगम की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक गरीब बेटे को नौकरी देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने दो टूक कहा कि इस योजना का असली मकसद किसी बेसहारा परिवार को अचानक आए भुखमरी के संकट से बचाना है, न कि उन्हें दफ्तरों के चक्कर कटवाना।

क्या है अंबिकापुर का यह पूरा मामला?

यह मामला सरगुजा संभाग के अंबिकापुर नगर निगम की है। वहां एक सफाई कर्मचारी का नौकरी के दौरान ही अचानक निधन हो गया। उनके पीछे पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी का भरा-पूरा परिवार बेसहारा हो गया। पूरा घर उन्हीं की कमाई से चलता था। पिता की मौत के बाद जब बेटे ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए फॉर्म भरा, तो नगर निगम के कमिश्नर ने उसे यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि तुम्हारी मां तो पहले से ही सफाई कर्मचारी हैं।

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मां की कम तनख्वाह से कैसे पलेगा इतना बड़ा परिवार?

अंबिकापुर नगर निगम ने साल 2013 की नीति का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। इसके बाद पीड़ित बेटा हार मानने के बजाय सीधे कोर्ट पहुंच गया। उसने अपनी दलील में बताया कि मां की तनख्वाह इतनी कम है कि उससे 6 लोगों के बड़े परिवार का पेट पालना नामुमकिन है। हाईकोर्ट ने भी इस बात को सही माना। कोर्ट ने अधिकारियों से तीखा सवाल पूछा कि क्या आपने एक बार भी यह जानने की कोशिश की कि मुख्य कमाने वाले की मौत के बाद वह परिवार किस हाल में जी रहा है?

बिलासपुर हाईकोर्ट की अधिकारियों को तल्ख टिप्पणी

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा सिर्फ तकनीकी नियमों को ढाल बनाकर किसी जरूरतमंद का हक नहीं मारा जा सकता। किसी सदस्य का बेहद कम तनख्वाह वाले पद पर होना यह साबित नहीं करता कि परिवार अमीर हो गया है। अनुकंपा नियुक्ति कोई मूल अधिकार नहीं है, बल्कि यह सरकार की एक कल्याणकारी व्यवस्था है। हर एक केस की जमीनी और मानवीय जांच अलग से होनी चाहिए।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।