रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के प्रदेश भर के ठेकेदारों ने लंबित भुगतान को लेकर राजधानी रायपुर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के मुख्यालय नीर भवन के बाहर प्रदर्शन किया। ठेकेदारों का आरोप है कि काम पूरा किए दो-दो साल बीतने के बाद भी उन्हें करोड़ों रुपयों का भुगतान नहीं किया गया है।

ठेकेदारों का कहना है कि उनका कुल 2 हजार करोड़ रुपए का बकाया लंबित है। आरोप है कि है कि जेजेएम के संचालक दो वर्ष से नित नए नीयम जारी कर भुगतान नहीं कर रहे हैं। साथ ही जिन ठेकेदारों ने अपने काम पूरे कर लिए हैं उन्हें हैंडओवर नहीं करने दे रहे हैं। 

कर्ज से परेशान 3 ठेकेदारों ने कर ली आत्महत्या 

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ठेकेदार संघ के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने बताया कि बीते 8 जून को उनके प्रतिनिधिमंडल ने मिशन संचालक अब्दुल कैशर हक से मुलाकात कर विरोध प्रदर्शन की सूचना दी थी। मगर तब उन्होंने 30 जून तक निराकरण करने और तब तक विरोध प्रदर्शन न करने का आग्रह किया था। इस दौरान भुगतान न होने और इसके चलते आर्थिक समस्या से जूझ रहे 3 ठेकेदारों ने आत्महत्या कर ली। वीरेश शुक्ला ने बताया कि संचालक की वादाखिलाफी और हठधर्मिता के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया है।

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हड़ताल और विवाद के मुख्य बिंदु

भुगतान में देरी: ठेकेदारों की मुख्य मांग महीनों से अटके हुए बिलों का तुरंत भुगतान करना है। 

टेंडर निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्ट: राज्य के कई हिस्सों (जैसे रायपुर, रायगढ़, और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में निर्धारित समय में काम पूरा न करने के आरोप में कई एजेंसियों के खिलाफ प्रशासन द्वारा टेंडर निरस्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की गई है। उधर ठेकेदारों को काली सूची में डालने के प्रशासन के फैसलों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी और इसे बिना ठोस सबूत के कठोर कदम बताया।

पुलिस के साथ हुई धक्का मुक्की

ठेकेदार जब नीर भवन में प्रदर्शन करने पहुंचे तब यहां के प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया गया, वहीं पुलिस ने बेरीकेट भी लगा दिया। इस दौरान कार्यालय जाने की कोशिश कर रहे ठेकेदारों की पुलिस से जमकर धक्का मुक्की हुई। आखिरकार प्रदर्शकारियों ने सड़क पर ही घेराव कर दिया। इस दौरान उनसे बातचीत करने के लिए मिशन के अतिरिक्त संचालक ओंकेश चंद्रवंशी यहां पहुंचे मगर ठेकेदारों ने उन्हें वापस भेज दिया और संचालक से मिलने की जिद पर अड़े रहे।

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आत्महत्या करने वाले ठेकेदार की बेवा भी प्रदर्शन में हुई शामिल

पीएचई विभाग में कथित तौर पर बकाए का भुगतान नहीं मिलने के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे खैरागढ़ के ठेकेदार गणेश्वर जंघेल ने आत्महत्या कर ली। गणेश्वर जंघेल की बेवा ने अपनी मासूम बच्ची के साथ आज हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उसने अपने पति की मौत के लिए पीएचई के अफसरों को जिम्मेदार ठहराया।

नहीं मिले संचालक तो विधानसभा घेराव का फैसला 

नीर भवन के सामने घंटों तक चले प्रदर्शन के आखिर में जल जीवन मिशन के अतिरिक्त संचालक ओंकेश चंद्रवंशी फिर एक बार ठेकेदारों से मिलने पहुंचे और बताया कि संचालन अब्दुल कैशर हक बिलासपुर दौरे पर गए हुए हैं। रिटायरमेंट के बाद विभाग में खुद संविदा के तौर पर सेवाएं दे रहे चंद्रवंशी ने बकाया भुगतान का कोई भी आश्वासन देने से इंकार कर दिया। यहां तक कि ठेकेदार की बेवा को मुआवजे के तौर पर भी बकाए के भुगतान में उन्होंने असमर्थता जता दी और कहा कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है।

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इसके बाद ठेकेदारों के संघ ने फैसला किया कि जब अफसर ही नहीं सुन रहे हैं तब वे आगामी मानसून सत्र में विधानसभा का घेराव करेंगे। इसकी तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी। ठेकेदारों का कहना है कि अफसर आए दिन नए नियम बनाकर काम पूरा होने के बावजूद भुगतान नहीं कर रहे हैं और यह बकाया बढ़कर 2 हजार करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है। आलम यह है कि पूरे प्रदेश में जल जीवन मिशन का काम फंड के अभाव में ठप्प पड़ गया है और अब बिना भुगतान के ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं हैं। देखना यह है कि इस मामले का पटाक्षेप करने के लिए विभाग और सरकार द्वारा क्या कदम उठाया जाता है।