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रायपुर। आर्थिक अनियमितता के मामलों को सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक ने करने के विषय में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने जवाब मांगा है। हाल ही में लगे एक पीआईएल राज कुमार मिश्रा वर्सेस स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ एवं अन्य में हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो एवं राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में दर्ज होने वाले एफ आई आर को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड ना करने के मामले को गलत बताया है।

वहीं उक्त पीआईएल में कोर्ट के द्वारा जल्द ही बड़ा निर्णय लेने की बात कही जा रही है। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 2015 में आदेश देने के बावजूद भी राज्य के ACB और EOW के द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में दर्ज एफ आई आर को सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा था।

उक्त विभागों में दर्ज FIR को विभागों द्वारा वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के लिए चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा के द्वारा हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें गुरुवार के दिन हाई कोर्ट की डबल बेंच ने विभाग के वकील को 14 मार्च 2022 से पूर्व जवाब शपथ पत्र जमा करने का आदेश दिया है।

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बीते गुरुवार को हुई याचिका की सुनवाई में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से उपस्थित वकील से विभाग में दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड ना करने का कारण पूछा। जिसके जवाब में सरकारी वकील ने विभागों में दर्ज मामलों का गोपनीय होने के कारण सार्वजनिक ना किया जाना बताया।

उक्त कथन पर याचिकाकर्ता राजकुमार मिश्रा के द्वारा कहां गया कि राज्य में अन्य विभाग जैसे राज्य के पुलिस थाना में सीबीआई एनआईए रेलवे पुलिस आदि के द्वारा दर्ज एफ आई आर को 1 दिन के भीतर ऑनलाइन वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है राज्य के पुलिस थानों में ज्यादातर केस को सार्वजनिक किया जाता है। परंतु आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों को गोपनीय बता कर ईओडब्ल्यू तथा एंटी करप्शन ब्यूरो के द्वारा मामलों के सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है।

जिस पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सरकारी वकील को अगली सुनवाई से पूर्व जवाब शपथ पत्र जमा करने हेतु आदेशित किया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डबल बेंच के द्वारा नोटिस से संबंधित फॉर्मेलिटी को छोड़कर शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के लिए 14 मार्च 2022 के पूर्व समय निर्धारित किया गया जनहित याचिका की अग्रिम सुनवाई 14 मार्च 2022 को निर्धारित की गई है।

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यदि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो में एफ आई आर वेबसाइट पर आने लगे तो निश्चित रूप से राज्य के कुछ आर्थिक और भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधियों का कच्चा चिट्ठा पब्लिक डोमेन में आएगा

याचिकाकर्ता राजकुमार मिश्रा ने मामले में कहा है कि, सुनवाई के दिन सरकारी वकील के द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों को गोपनीय बताया गया साथ ही यह कहा गया कि गोपनीय होने के कारण भ्रष्टाचार के मामलों को सरकारी वेबसाइट पर नहीं डाला जाना चाहिए। सरकारी वकील का ऐसा कहना गलत है राज्य में घटित आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों को जनता के सामने लाना चाहिए। भ्रष्टाचार के मामले कभी भी गोपनीय नहीं हो सकते भ्रष्टाचार के मामले उजागर होना ही चाहिए।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।