बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली के करंट से इंसान और जानवरों की मौत की बढ़ती घटनाओं पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने कोर्ट को बताया कि उसने करंट से होने वाले हादसे रोकने के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर ली है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस पर भरोसा तो जताया, लेकिन दो टूक कहा – “SOP बनाना ही काफी नहीं, ये फाइलों तक सीमित न रहे, धरातल पर प्रभावी ढंग से काम होना चाहिए।” कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 तय की है।

जनहित याचिका पर हो रही है सुनवाई

दरअसल प्रदेश में बिजली के झटके से बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। इस तरह की घटनाओं को स्वत: संज्ञान में लेते हुए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने जनहित याचिका दायर कर दी। इस मामले की सुनवाई के बीच वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने इसी मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर कर दी। उन्होंने बताया कि जंगलों में विचरण करने वाले हाथी बिजली के तारों की चपेट में आकर मारे जा रहे हैं। जंगल में बिजली के तारों का काफी नीचे होना और ग्रामीणों द्वारा खेतों तथा शिकार के लिए बिजली के तारों का बिछाना इसकी प्रमुख वजह है। लगातार हो रही सुनवाई के बीच हाई कोर्ट ने सीएसपीडीसीएल से हादसों को रोकने की कार्ययोजना मांगी। 

See also  Chhattisgarh High Court: शोकसभा के नाम पर पूरे दिन कोर्ट का कामकाज बंद नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट के निर्देश पर CSPDCL अफसरों और विद्युत निरीक्षक की समिति बनी। पहली बैठक 29 जुलाई, दूसरी 11 अगस्त को मसौदे पर और अंतिम बैठक 21 अगस्त को हुई, जिसमें SOP को फाइनल किया गया।

SOP में क्या है खास?

– काम से पहले सुरक्षा: किसी भी लाइन पर काम से पहले JE स्तर के अधिकारी से अनुमति, लाइन बंद (De-energize), अर्थिंग और सेफ्टी जोन बनाना अनिवार्य।

– सुरक्षा उपकरण: हेलमेट, इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी शूज, सेफ्टी बेल्ट/फुल बॉडी हार्नेस, चश्मा और रिफ्लेक्टिव जैकेट जरूरी।

– जांच और मेंटेनेंस: पोल, तार, इंसुलेटर, ट्रांसफार्मर, झुके पोल और पेड़ों की शाखाओं की नियमित जांच, लॉगबुक में एंट्री।

– चोरी पर सख्ती: बिजली चोरी और अवैध कनेक्शन पर विद्युत अधिनियम 2003 के तहत कनेक्शन कटेगा और FIR होगी।

– करंट वाली बाड़ पर नजर: खेतों और वन क्षेत्रों में अवैध विद्युत बाड़ मिलने पर तुरंत हटाकर पुलिस में शिकायत।

– अफसरों की जिम्मेदारी: अतिरिक्त मुख्य अभियंता और जहां नहीं हैं वहां अधीक्षण अभियंता को पदेन विद्युत सुरक्षा अधिकारी बनाया गया।

– जागरूकता: 1912 टोल फ्री नंबर और ‘मोर बिजली’ ऐप का प्रचार, पोस्टर-बैनर और मॉक ड्रिल।

See also  Chhattisgarh High Court के आदेश को किया दरकिनार, पेशी पर भी नहीं पहुंचे CEO; अब हाई कोर्ट ने पूछा- क्यों न हो अवमानना?

बिजली लाइन पर काम से पहले बिजली बंद और अर्थिंग जरूरी

एसओपी के अनुसार किसी भी तरह के विद्युत कार्य से पहले सक्षम अधिकारी, कम से कम कनिष्ठ अभियंता स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। कार्यस्थल पर संबंधित फीडर या लाइन की बिजली आपूर्ति बंद कर लाइन को डी-एनर्जाइज करना होगा। इसके बाद पर्याप्त अर्थिंग और सुरक्षित जोन तैयार करने के बाद ही काम शुरू किया जा सकेगा।

कार्यस्थल पर चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग लगाना भी जरूरी होगा। बिजली लाइनों, पोल, इंसुलेटर, कंडक्टर, जम्पर, कनेक्शन, क्षतिग्रस्त उपकरण, झुके पोल, अर्थिंग सिस्टम और पेड़ों की शाखाओं की नियमित जांच और मरम्मत की व्यवस्था की गई है।

हेलमेट, इंसुलेटेड दस्ताने और सेफ्टी बेल्ट अनिवार्य

विद्युत कार्य में लगे कर्मचारियों को हेलमेट, इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी शूज, सेफ्टी बेल्ट या ऊंचाई पर काम के लिए फुल बॉडी हार्नेस, सुरक्षा चश्मे और रिफ्लेक्टिव जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना होगा। काम पूरा होने के बाद सभी उपकरण हटाकर स्थल को पूरी तरह सुरक्षित करने और इसकी सूचना कंट्रोल रूम व संबंधित अधिकारी को देने का प्रावधान है। किए गए रखरखाव का विवरण लॉगबुक या रजिस्टर में दर्ज करना होगा।

बिजली चोरी और अवैध कनेक्शन पर तत्काल कार्रवाई

एसओपी में बिजली चोरी, अनधिकृत उपयोग और अवैध कनेक्शन को दुर्घटनाओं का संभावित कारण मानते हुए सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। बिजली चोरी के मामलों में विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत कनेक्शन काटने और पुलिस थाने में लिखित शिकायत करने की व्यवस्था है। विद्युत दुर्घटनाओं की सूचना संबंधित थाने को देने और चोरी, अनधिकृत कनेक्शन या विद्युत उपकरण से छेड़छाड़ के कारण हुई दुर्घटना में तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान भी रखा गया है।

See also  CG Braking: पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक पर लगे महिला यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच कर रही विशाखा कमेटी की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट की रोक, कमेटी के अध्यक्ष और राज्य सरकार को नोटिस

इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को है। कोर्ट ने बिजली के खतरे को रोकने के लिए खास तौर पर ग्रामीण, कृषि और वन क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण पर जोर दिया है।

FAQ: बिजली को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई 

सवाल 1. CSPDCL ने SOP क्यों बनाई?

जवाब: बिजली करंट से इंसान और जानवरों की मौत की घटनाएं रोकने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर SOP बनाई गई।

सवाल 2. हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जवाब: कोर्ट ने कहा SOP फाइलों तक सीमित न रहे, ग्रामीण, कृषि और वन क्षेत्रों में इसका सख्ती से और लगातार पालन सुनिश्चित किया जाए।

सवाल 3. अवैध विद्युत बाड़ पर क्या कार्रवाई होगी?

जवाब: खेतों में करंट वाली अवैध बाड़ मिलने पर उसे सुरक्षा उपकरणों से हटाकर पुलिस में शिकायत और FIR दर्ज की जाएगी।