Social boycott persists in Chhattisgarh: कानून बन गए, देश चांद पर पहुंच गया, लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में आज भी सामाजिक बहिष्कार, दबंगई और पंचायती दादागिरी जैसी कुप्रथाएं जिंदा हैं। धमतरी जिले के कुरूद थाना क्षेत्र के बोधछापर गांव से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पूरे परिवार का 16 मई 2025 से सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है और गांव छोड़ने की धमकी देकर उनसे अवैध वसूली की जा रही है। परेशान परिवार ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा परिवार सामूहिक आत्महत्या कर लेगा।
पीड़ित नरोत्तम साहू और उनके परिवार ने शिकायत में बताया है कि 21 अक्टूबर 2026 को गांव की बैठक में दिनेश चंद्राकर, रूपचंद साहू, पवन साहू, राजू राम साहू समेत अन्य लोगों ने उन्हें यह कहकर बोलने से रोक दिया कि “तुम गांव से बहिष्कृत हो, नहीं बोल सकते।” आरोप है कि इसी दौरान दिनेश चंद्राकर ने अश्लील गाली देते हुए नरोत्तम का कॉलर पकड़कर मारपीट की।
हमले में घायल हुआ युवक
इतना ही नहीं, तीर्थ राम साहू, नागेश्वर साहू, दुलेश्वर साहू, पूजा साहू समेत महिलाओं तक से लाठी-डंडों से मारपीट की गई। उसी दिन हेमंत देवदास नामक युवक के साथ भी मारपीट की गई, जो खून से लथपथ होकर मूर्छित हो गया और उसे धमतरी मिशन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
कामकाज से रोक रहे दबंग
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें रोजी-मजदूरी, लेन-देन, खेती-किसानी और गांव के धार्मिक कार्यक्रमों रामधुनी-रामायण तक में शामिल होने से रोका जा रहा है। रात में हथियार लेकर घर के आसपास दहशत फैलाई जा रही है।
गांव छोड़ने की धमकी देकर अवैध जुर्माना वसूली
शिकायत में आर्थिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं –
- तीरथ राम साहू से 15,000 रुपये
- भरत ध्रुव से 5,000 रुपये
- परदेसी साहू और तेजेंद्र साहू से 2,000-2,000 रुपये
- चंपेश्वर, ओंकार, ओमप्रकाश, पूनमचंद, चंदन से 3,000-3,000 रुपये
तेजेंद्र साहू को तो 10,000 रुपये न देने पर गांव छोड़ने की धमकी तक दी गई।
छत्तीसगढ़ में बहिष्कार की कुप्रथा पर कब लगेगा विराम?
यह कोई पहला मामला नहीं है। गरियाबंद, कांकेर, सरगुजा और बस्तर अंचल में पहले भी जादू-टोना, जमीन विवाद या आपसी रंजिश के नाम पर परिवारों के सामाजिक बहिष्कार के मामले सामने आते रहे हैं। गांव की अवैध पंचायतें खुद को अदालत समझकर जुर्माना लगाती हैं और न देने पर मारपीट व बहिष्कार किया जाता है।
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि दिनेश चंद्राकर सहित सभी आरोपियों पर तुरंत FIR दर्ज कर सुरक्षा दी जाए।
ऐसे मामलों में क्या कहता है कानून? – पीड़ित क्या करें?
- कानून क्या है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) और छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम तथा BNS की धारा 127 (जानबूझकर अपमान), 351 (आपराधिक धमकी), 308 (जबरन वसूली) के तहत सामाजिक बहिष्कार करना गंभीर अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई फैसलों में कहा है कि किसी भी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार असंवैधानिक है।
- पीड़ित क्या करें:
- सबसे पहले जिला कलेक्टर, SDM और SP को लिखित शिकायत दें
- 1098, 112 या महिला हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें
- सबूत के तौर पर मारपीट, गाली-गलौज का वीडियो/ऑडियो बनाएं
- मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग में शिकायत करें
- आत्महत्या जैसा कदम कभी न उठाएं, कानूनी मदद लें
FAQ: सामाजिक बहिष्कार का मामला
Q1. धमतरी के बोधछापर में क्या घटना हुई है?
धमतरी के कुरूद थाना क्षेत्र के बोधछापर गांव में नरोत्तम साहू और उनके पूरे परिवार का 16 मई 2025 से सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लोगों ने उन्हें गांव की बैठक में बोलने से रोका, मारपीट की और गांव छोड़ने की धमकी देकर अवैध जुर्माना वसूल रहे हैं।
Q2. पीड़ित परिवार ने क्या आरोप लगाए हैं?
परिवार का आरोप है कि 21 अक्टूबर 2026 को दिनेश चंद्राकर, रूपचंद साहू, पवन साहू, राजू राम साहू ने अश्लील गाली-गलौज, कॉलर पकड़कर मारपीट की और लाठी-डंडों से हमला किया। हेमंत देवदास नामक व्यक्ति को गंभीर चोटें आईं और वह मिशन अस्पताल में भर्ती है। परिवार से 2 हजार से 15 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई है।
Q3. सामाजिक बहिष्कार को लेकर कानून क्या कहता है?
सामाजिक बहिष्कार करना असंवैधानिक और अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127, 351(2), 308 और SC/ST एक्ट व छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना अधिनियम के तहत ऐसे लोगों पर FIR दर्ज हो सकती है। इसमें 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
Q4. ऐसे मामलों में पीड़ित को क्या करना चाहिए?
पीड़ितों को तुरंत SDM, कलेक्टर और SP को लिखित शिकायत देनी चाहिए, 112 डायल करें, घटना का वीडियो-ऑडियो सबूत रखें और मानवाधिकार आयोग में शिकायत करें। आत्महत्या जैसा कोई कदम न उठाएं।


