Dhamtari Triple Murder Case: छत्तीसगढ़ के धमतरी में तीन युवकों की हत्या के मामले में अदालत ने पांच बालिग आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। धमतरी के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह कोर्राम की अदालत ने 12 अगस्त 2026 को यह फैसला सुनाया।
फैसले से नाराज मृतकों के परिजनों ने कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय आरोपियों पर जूते-चप्पल और पत्थर फेंके। परिजन आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे थे।
एक साल में आया ट्रिपल मर्डर केस का फैसला
यह मामला धमतरी के अर्जुनी थाना क्षेत्र के भोयना गांव स्थित अन्नपूर्णा ढाबे के पास का है। 11 अगस्त 2025 की रात पांच युवक कार से धमतरी घूमने निकले थे। रास्ते में कुछ पूछने के लिए वे ढाबे के पास रुके थे। वहां पहले से मौजूद आठ लोग बिल भुगतान को लेकर विवाद कर रहे थे और ढाबे की कुर्सियां तोड़ रहे थे। कार सवार युवकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद विवाद बढ़ गया।
बहस से मारपीट और फिर तीन हत्याएं
पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान नशे में धुत आरोपियों ने युवकों से गाली-गलौज की। बहस के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान मुख्य आरोपी ने चाकू से तीन युवकों पर हमला कर दिया। हमले में तीनों दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई।
वारदात के बाद आरोपियों ने ली थी सेल्फी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने तस्वीरें खींची थीं। जांच के दौरान सामने आया यह तथ्य मामले की गंभीरता को और बढ़ाने वाला था।
पांच बालिग आरोपियों को उम्रकैद
पुलिस ने जांच के बाद पांच बालिग और तीन नाबालिग आरोपियों को पकड़ा था। लोक अभियोजक गीतेश प्रजापति के मुताबिक, ट्रिपल मर्डर मामले में पांच बालिग आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा बलवा करने के मामले में दो-दो साल, हथियार रखने के मामले में पांच-पांच साल और अन्य लोगों से मारपीट के मामले में छह-छह महीने की सजा भी सुनाई गई है। कुछ आरोपियों को हथियार रखने के मामले में अलग से सजा मिली है। हालांकि तीन साल तक की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
फांसी की मांग पूरी नहीं होने पर परिजनों में नाराजगी
अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। मृतकों के परिजन भी यही सजा चाहते थे। फैसले में उम्रकैद होने के बाद परिवारों में नाराजगी दिखाई दी। परिजनों ने कहा कि उनके घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं और आरोपियों को उम्रकैद नहीं, बल्कि फांसी मिलनी चाहिए थी। एक रिश्तेदार ने भावुक होकर बताया कि उनकी डेढ़ साल की बेटी आज भी दरवाजे की तरफ देखती है और उसे लगता है कि उसके पिता चॉकलेट लेकर वापस आएंगे।
कोर्ट के बाहर दिखा गुस्सा
फैसले के बाद कोर्ट से बाहर निकलते समय मृतकों के नाराज परिजनों ने आरोपियों पर जूते-चप्पल और पत्थर फेंके। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच दोषियों को वैन से जेल पहुंचाया। परिजनों ने कहा है कि वे अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।
11 नवंबर को चालान, 12 अगस्त को फैसला
अभियोजन पक्ष के वकील के मुताबिक, इस मामले में करीब एक साल के भीतर फैसला आया। 11 नवंबर को कोर्ट में चालान पेश किया गया था और 12 अगस्त 2026 को अदालत ने फैसला सुना दिया। अब मृतकों के परिजनों की अगली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। वे उम्रकैद की सजा को चुनौती देकर फांसी की मांग को लेकर ऊपरी अदालत का रुख कर सकते हैं।


