आजादी के बाद पहली बार अबुझमाड़ अंचल में हो रहा है सर्वे, 10 हजार किसानों को मिलेगा भू-स्वामित्व

रायपुर। लगभग 4 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले अबुझमाड़ का क्षेत्र पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। अबुझमाड़ का क्षेत्र वर्तमान में नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा के अंतर्गत समाहित है। इस अंचल में जनजाति परिवार के लोग निवास करते हैं यह क्षेत्र लंबे समय से अलग-थलग रहा है। यहां भूमि का सर्वे आजादी के बाद से नहीं हो पाया था, जिसके कारण यहां निवास कर रहे आदिवासी किसानों को कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ सरकार ने अबुझमाड़ अंचल के किसानों की दिक्कत को समझते हुए यहां मसाहती सर्वे कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

अबूझमाड़ के 275 गांवों में चलेगा सर्वे

नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूूझमाड़ अंतर्गत बस्तर संभाग के जिला नारायणपुर, बीजापुर, तथा दंतेवाड़ा के लगभग 275 से अधिक असर्वेक्षित ग्राम स्थित हैं। इन ग्रामों का कोई भी शासकीय अभिलेख तैयार नहीं है। मंत्रिपरिषद द्वारा निर्णय लिया गया कि अबूझमाड़ क्षेत्र के असर्वेक्षित ग्रामों में वर्षों से निवासरत लगभग 50 हजार से अधिक लोगों को उनके कब्जे में धारित भूमि का मसाहती खसरा एवं नक्शा उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसान परिवारों के पास उनके कब्जे की भूमि का शासकीय अभिलेख उपलब्ध हो सकेगा तथा वे अपने काबिज भूमि का अंतरण कर सकेंगे। इस प्रकार अबूझमाड़ क्षेत्र अंतर्गत लगभग 10 हजार किसानों को 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का स्वामित्व प्राप्त होगा।

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नारायणपुर में 246 गांवों का होगा सर्वे

27 अगस्त 2019 को मंत्री परिषद के निर्णय के पालन में छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग द्वारा नारायणपुर जिले में मसाहती सर्वे के लिए 246 ग्रामों को अधिसूचित किया गया। इन गांवों में सम्पूर्ण ओरछा विकासखण्ड के 237 ग्राम तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्राम शामिल थे। अब तक नारायणपुर जिले के 110 ग्रामों का मसाहती सर्वे किया जा चुका है जिसमे से नारायणपुर विकासखण्ड के असर्वेक्षित 9 ग्रामों का तथा ओरछा विकासखण्ड के 101 ग्रामों का सर्वे किया जा चुका है। अब तक 7 हजार 7 सौ से अधिक लोगों को मसाहती खसरा का वितरण किया जा चुका है।

किसानों को मिल रहा मालिकाना हक

अबुझमाड़ अंचल में बहुत से किसान वर्षों से वन क्षेत्रों के भीतर काबिज भूमि पर खेती करते आ रहे थे, लेकिन इस क्षेत्र में भूमि का सर्वें नहीं होने के कारण उनके पास भूमि संबंधी कोई भी दस्तावेज नहीं थे। जिसके कारण यहां के लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

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दो हजार से अधिक किसान बेचेंगे पहली बार धान

जिला प्रशासन नारायणपुर द्वारा जिले के अबुझमाड़ अंचल में सर्वे का काम किया जा रहा है। कई किसानों को मसाहती पट्टे का वितरण किया जा चुका है। चालू खरीफ सीजन में अबूझमाड़ के 2 हजार 193 किसानों ने मसाहती खसरा मिलने के बाद पहली बार धान बेचेंगे। ऐसे किसानों से मसाहती सर्वे के आधार पर शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। इससे किसानों को शासकीय योजनाओं के साथ-साथ अन्य लाभ भी मिलना शुरू हो गया है।

पप्पु पोटाई ने पहली बार समर्थन मूल्य पर बेचा धान

ऐसे ही नारायणपुर जिले के ग्राम कदांड़ी के एक किसान है श्री पप्पू पोटाई, जिन्हें लगभग साढ़े तीन एकड़ भूमि का मसाहती खसरा दिया गया है। अब उन्हें जमीन का मालिकाना हक मिल गया है। मसाहती सर्वे से प्राप्त पट्टे के आधार पर धान खरीदी केन्द्र में धान का विक्रय करने आये ग्राम कंदाड़ी के युवा आदिवासी किसान पप्पू पोटाई ने बताया कि लगभग साढ़े 3 एकड़ खेत में उसने इस बार धान की फसल लगायी थी। वह लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय करने आया था। उन्होंने बताया कि पूर्व वर्षों में भी वह धान की फसल लेता था, किन्तु सरकारी दस्तावेज नहीं होने के कारण वह समर्थन मूल्य पर धान बेच नहीं पाते थे। मजबूरी में उन्हें बिचौलियों को अपनी फसल आधी कीमत पर बेचनी पड़ती थी। मसाहती सर्वे के बाद उन्हें भूमि समतलीकरण और डबरी निर्माण के लिए भी सहायता मिली है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।