Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद वन परिक्षेत्र में मकड़ियों की जैव-विविधता पर अध्ययन कर रहे शोधकर्ताओं ने Mangora baii नाम की ऑर्ब-वीवर मकड़ी को भारत में पहली बार खोज निकाला है। यह प्रजाति इससे पहले वर्ष 2021 में चीन में दर्ज की गई थी।
गरियाबंद-देवभोग मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर मिली इस मकड़ी की पहचान करने में शोधकर्ताओं को लगभग एक महीने का समय लगा। इंडियन जर्नल ऑफ नेचुरल साइंस ने 24 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर इस खोज की जानकारी प्रकाशित की।
गरियाबंद में कहां मिली Mangora baii मकड़ी?
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मकड़ी गरियाबंद-देवभोग मार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर मिली। शुरुआती तौर पर इसकी तस्वीरों का उपलब्ध शोध से मिलान किया गया, लेकिन भारत में इस प्रजाति का कोई पूर्व रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद शोध दल ने मकड़ी की शारीरिक बनावट का बारीकी से अध्ययन किया। शरीर पर मौजूद धारियों, पैरों की संरचना और अन्य विशिष्ट लक्षणों के आधार पर इसकी पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
एक महीने तक चली पहचान की प्रक्रिया
मकड़ी की पहचान के लिए शोधकर्ताओं ने पहले उसकी तस्वीरों और शारीरिक विशेषताओं का अध्ययन किया। इसमें अंडाकार उदर पर चौड़ी अनुप्रस्थ काली धारियां, काला सेफलोथोरैक्स, पैरों की लंबी और चौड़ी जोड़ियां तथा उदर के निचले हिस्से में चौड़ी अनुदैर्ध्य रेखा जैसी विशेषताएं देखी गईं। इन लक्षणों के आधार पर टीम ने अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों की तलाश शुरू की। करीब एक महीने की खोज के बाद वर्ष 2021 में चीन में प्रकाशित एक शोध में इससे मिलती-जुलती मकड़ी की तस्वीर मिली। इसके बाद शोधकर्ताओं ने प्रजाति की पहचान से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शोध और आंकड़ों की समीक्षा के बाद इस प्रजाति का भारत में पहला रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
शोध दल में कौन-कौन शामिल हैं?
- डॉ. अविनाश आर. निचत: एम. वी. वी. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भखारा, धमतरी।
- डॉ. के. के. हैरिस: शासकीय दूधाधारी बजरंग गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, रायपुर।
- जशवंत नायक: शासकीय दूधाधारी बजरंग गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, रायपुर।
- हितेश कुमार वारते: श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ की जैव-विविधता के लिए अहम है यह खोज
गरियाबंद में Mangora baii का पहला भारतीय रिकॉर्ड राज्य के वन क्षेत्रों में मौजूद जैव-विविधता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह खोज बताती है कि वन क्षेत्रों में कई प्रजातियों के वितरण और मौजूदगी से जुड़ी जानकारी अभी वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए सामने आ सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के अलग-अलग वन क्षेत्रों में लगातार वैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जाने से भविष्य में अन्य प्रजातियों के वितरण से संबंधित नए तथ्य भी सामने आ सकते हैं। यह उपलब्धि मकड़ियों की जैव-विविधता और उनके भौगोलिक वितरण को समझने के प्रयासों में एक नया तथ्य जोड़ती है। गरियाबंद में दर्ज यह प्रजाति राज्य के वन क्षेत्रों में आगे होने वाले शोध के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।



