राज्यपाल उइके ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को नगरीय निकाय बनाने को ठहराया गलत, आदिवासियों को उनका हक़ दिलाने का किया वादा
राज्यपाल उइके ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को नगरीय निकाय बनाने को ठहराया गलत, आदिवासियों को उनका हक़ दिलाने का किया वादा

रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने बस्तर से राजभवन पहुंचे आदिवासियों से कहा कि “पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के गांवों को नगरीय निकाय बनाना अवैधानिक है। राज्य सरकार को ग्राम पंचायतों को नगर पँचायत नहीं बनाना था। पूर्व की सरकार ने इस पर जो भी निर्णय लिया वह बहुत ही गलत है। आप लोग थोड़ा धैर्य रखिए। मैं आपसे वादा करती हूं, आपको आपका हक मिलेगा।

पदयात्रियों को सहृदय बुलाया राजभवन में

बस्तर नगर पंचायत के सैकड़ों आदिवासियों ने अपने इलाके को ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर पदयात्रा की और आज रायपुर पहुंचे। उनकी ओर से प्रमुख आदिवासी नेताओ को राज्यपाल से मिलने दिया गया। इस दौरान हुई चर्चा के बाद राज्यपाल ने पदयात्रियों से खुद ही मिलने की इच्छा जताई। पहले तो उन्होंने राजभवन चौक के एक ओर रोककर रखे गए आदिवासियों के पास जाकर मिलने की बात कही, लेकिन बाद में यह तय किया गया कि सभी पदयात्रियों को राजभवन में ही बुला लिया जाये। आनन-फानन में सारी तैयारियां की गई और राजभवन के गार्डन में सभी को बिठाया गया। राज्यपाल ने कहा- मुझे सब पता है

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राजभवन पहुंचे बस्तर के आदिवासियों से मिलकर राजयपाल उइके ने ख़ुशी का इजहार किया। पदयात्रियों की ओर से उनके प्रमुख बुधराम बघेल ने अनुरोध किया कि उन्हें उनका बस्तर ग्राम पंचायत लौटा दिया जाये। इस पर राजयपाल ने कहा कि उन्हें इसके बारे में सब कुछ पता है. उनकी पदस्थापना के बाद इस संबंध में अनेक पत्र आये हैं।
राज्यपाल ने कहा कि कहां-कहां पर गड़बड़ी हुई है, सबका परीक्षण करा रही हूं. मैं कानूनी सलाह भी ले रही हूं। मैं पूरी तरह से आप सभी के साथ हूं। आप लोगों की मांगों को लेकर मैंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। टाईगर रिजर्व क्षेत्र में विस्थापन हो रहा है। वन विभाग के अधिकारी डांट-फटकार कर बेदखल कर देते हैं। लोगों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है. राज्यपाल अनुसुइया उईके ने आदिवासियों को सांत्वना देते हुए कहा कि मैं निराश नहीं जाने देना चाहती थी, इसलिए उन्हें राजभवन बुलाया गया है। उन्होंने बस्तर के नागरिकों को राजभवन के प्रोटोकॉल की भी जानकारी दी और कहा कि वे बिना समय दिए उनसे मिल रहीं हैं। अब से कभी भी उनसे मिलने आना हो तो एक सप्ताह पूर्व इसकी सूचना भेज दें, ताकि वे समय दे सकें।

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सरकार ने “मेशा” कानून का दिया हवाला, अब तक 34 नगर पंचायत बन चुके

राज्यपाल ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि अब तक 80 ग्राम पंचायतों को तोड़कर कुल 34 नगर पंचायत बनाए गए हैं। इस पर सीएम और प्रशासन को पत्र लिखा गया, तब जवाब आया कि जब मेशा कानून आएगा तब देख लेंगे मगर 2001 के बाद वह बिल पास ही नहीं हुआ। पांचवी अनुसूची में जो अधिकार मिला है वो जाने नहीं दिया जाएगा। पीएम से भी चर्चा इस पर हुई है और मंत्रालय में चर्चा जारी है।

मेशा कानून लागू होते ही पेशा कानून के नियमों का लाभ आदिवासियों को मिलेगा। आदिवासियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि खत्म हुए अधिकार को वापस दिलाया जाएगा. केंद्र या राज्य सरकार ऐसा कोई कानून लाती है तो लागू नहीं किया जाएगा।

राज्यपाल से मिले आश्वाशन पर बस्तर के पदयात्रियों और आदिवासी समाज के नेताओं ने संतोष जताया और उम्मीद की कि अनुसूचित क्षेत्रों में जो भी गैरकानूनी फैसले किये गए हैं, उन्हें जल्द से जल्द वापस कराया जाये।

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