हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रही पुलिस कॉन्स्टेबल (आरक्षक) प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। सिंगल बेंच के जस्विट पीपी साहू ने प्रमोशन प्रक्रिया में अंतिम आदेश जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विभाग प्रमोशन की प्रक्रिया को आगे जारी रख सकता है, लेकिन याचिका की अगली सुनवाई तक किसी भी पुलिसकर्मी का फाइनल पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।

क्या है पूरा विवाद? क्यों पहुंचे हाईकोर्ट

दरअसल, छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में आरक्षकों की प्रधान आरक्षक (Head Constable) पद पर प्रमोशन की विभागीय प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में नियमों का पालन न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कोरबा जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में राज्य शासन, गृह सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर रेंज और एसपी कोरबा को पक्षकार बनाया गया है।

नियमों का हवाला: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती, पदोन्नति, सेवा शर्त नियम 2007 (संशोधित) के अनुसार, यदि कोई पुलिस कर्मचारी अपनी स्वेच्छा (खुद की मर्जी) से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले की सीनियरिटी लिस्ट में उसका नाम सबसे नीचे (बॉटम सीनियरिटी) आ जाता है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस मुख्यालय मौजूदा प्रमोशन प्रक्रिया में इस नियम की सरेआम अनदेखी कर रहा है। विभाग उन आरक्षकों को भी उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख के आधार पर सीनियर मानकर प्रमोशन देने की तैयारी में है, जिन्होंने स्वेच्छा से जिला बदला था।

1 जून को जारी होनी थी फाइनल लिस्ट

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि हाईकोर्ट से इस समय अंतरिम राहत नहीं मिलती, तो नियमों के विपरीत 1 जून 2026 को फाइनल फिट लिस्ट जारी हो जाती, जिससे मूल जिले के आरक्षकों का हक मारा जाता। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अंतिम आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 15 जून 2026 तय की है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई कि पुलिस मुख्यालय के स्पष्टीकरण पत्र को इस याचिका में सीधे चुनौती नहीं दी गई है। सरकारी वकील ने यह भी बताया कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में याचिका दायर करने वाले कई पुलिसकर्मियों के नाम भी विभाग की फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।