फूड सेफ्टी के नाम पर अवैध वसूली, फिल्मी चर्ज पर फूड अफसर बनकर आए थे 20 ठग
फूड सेफ्टी के नाम पर अवैध वसूली, फिल्मी चर्ज पर फूड अफसर बनकर आए थे 20 ठग

टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ में फिल्मी तर्ज पर ठगी का मामला सामने आया है। प्रदेश के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्पेशल 20 की टीम ने खुद को फूड विभाग का अफसर बताते हुए व्यापारियों से अवैध वसूली की है। इस मामले में जब उच्चाधिकारियों से बात की गई तब जाकर इस ठगी का खुलासा हुआ। इसके बाद सभी को पकड़कर गौरेला थाना पुलिस को सौंप दिया गया।

धर्मशाला में बुलाकर काटते थे चालान

मिली जानकारी के अनुसार गौरेला स्थित अग्रसेन धर्मशाला में करीब 4 दिन पहले 20 लोग खुद को फूड सेफ्टी विभाग का अफसर और कर्मचारी बताकर रहने के लिए पहुंचे और यह सभी पूरे जिले में दुकानदारों, धान खरीदी करने वाले व्यापारियों, होटल मालिकों और डेयरी संचालकों की जांच कर रहे थे। इस दौरान एक से दो हजार रुपए के चालान भी काटे गए।

4 दिन में जिले भर से वसूले 8 लाख रुपए

आरोपियों ने 4 दिन में जिले के व्यापारियों से करीब 8 लाख रुपए वसूल लिए। इसको लेकर व्यापारियों ने आपस में चर्चा की तो उन्हें संदेह हुआ। इस पर रविवार को व्यापारियों ने विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की तो पता चला कि वह इस तरह का चालान नहीं करते हैं। इस मामले की जानकारी व्यापारियों ने पुलिस को दी तब जाकर सभी आरोपी पकड़ में आए।

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NGO के लिए काम करते हैं आरोपी

पुलिस के अनुसार अभी तक कि जांच में पता चला है कि आरोपी नागपुर की एक NGO के लिए काम करते हैं। NGO को फूड सेफ्टी की ट्रेनिंग देने का प्रोजेक्ट दिया गया है। इसकी आड़ में अवैध वसूली कर रहे थे। सभी आरोपी हिरासत में हैं। रसीदों की जांच जारी है। व्यापारियों के बयान के बाद FIR दर्ज करेंगे।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।