रायपुर। पंडरी कपड़ा मार्केट आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। इसे शहर की धड़कन या जान कहा जाए तो इसमें कोई दोराय नहीं है। वर्तमान समय में कपड़ा मार्केट पंडरी मध्यभारत का सबसे बड़ा फैशन का बाजार है। वर्तमान समय में मार्केट का ट्रेंड यह है कि बड़े-बड़े महानगरों में फैशनेबल कपड़े बाजार में नहीं पहुंच पाते वे कपड़ा मार्केट पंडरी में मिल जाते हैं।

ऐसा नहीं है कि पंडरी कपड़ा बाजार का व्यवसाय केवल छत्तीसगढ़ तक ही सीमित है। राजधानी रायपुर से छत्तीसगढ़ के विभिन्ना स्थानों समेत, झारखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, ओडिशा और मध्यप्रदेश के व्यापारी और खरीदार भी कपड़ों के लिए पंडरी मार्केट का ही रूख करते हैं। थोक कपड़ा बाजार व्यवसायी संघ का दावा है कि पंडरी कपड़ा बाजार को मध्यभारत सबसे बड़ा बाजार है।

इस तरह हुई पंडरी कपड़ा मार्केट की शुरूआत

यह मार्केट 39 साल पुराना है। 3 मार्च, 1983 को पंडरी कपड़ा मार्केट का शुभारंभ हुआ। इस दौरान कपड़ा बाजार में 60 से 70 कारोबारी दुकानें ही प्रमुख रूप से थीं। लेकिन धीरे-धीरे बाजार का स्वरूप बढ़ता गया और कारोबार भी रफ्तार पकड़ने लगा। इसके बाद आज की स्थिति में पंडरी कपड़ा बाजार में कुल 800 दुकानें हैं और बाजार में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

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पहले कुम्हारी में था कपड़ा बाजार

थोक पंडरी कपड़ा बाजार व्यवसायी संघ के अनुसार पंडरी से पहले कपड़ा बाजार कुम्हारी में स्थित था। 1971-72 के दौर में कुम्हारी से कपड़ों का बाजार चलता था। कुम्हारी से पहले कुछ समय के लिए गुढ़ियारी में भी कपड़ा व्यापारियों को बसाया गया। मगर वहां जगह की कमी के कारण बाजार को कुम्हारी शिफ्ट करना पड़ा। इसके बाद जब कुम्हारी में भी जगह की समस्या आने लगी तो कपड़ा बाजार को पंडरी में लाया गया। पंडरी कपड़ा बाजार के पहले अध्यक्ष मोतीलाल धाड़ीवाल और सचिव गोलराम अटलानी थे।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।