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Kondagaon: एकलव्य विद्यालय में अव्यवस्था की जांच के बाद देर रात अजाक थाने का घेराव, पुलिस और आदिवासी समाज में हुई झड़प

Kondagaon: एकलव्य विद्यालय में अव्यवस्था की जांच के बाद देर रात अजाक थाने का घेराव, पुलिस और आदिवासी समाज में हुई झड़प
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • एकलव्य विद्यालय… जो आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए बने हैं।
  • वहीं बच्चे भूखे, वहीं बच्चे गंदगी में, वहीं शिक्षिका मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर फिनाइल पी लेती है।
  • और जब जांच में ये सब सच निकलता है, तो न्याय मांगने गए आदिवासी समाज को ही थाने से धक्का देकर बाहर निकाल दिया जाता है।
  • यही है कोण्डागांव के श्यामपुर एकलव्य विद्यालय की पूरी कहानी, जो अब थाने के घेराव तक पहुंच गई है।

कोण्डागांव। एकलव्य विद्यालय… जो आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए बने हैं। वहीं बच्चे भूखे, वहीं बच्चे गंदगी में, वहीं शिक्षिका मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर फिनाइल पी लेती है। और जब जांच में ये सब सच निकलता है, तो न्याय मांगने गए आदिवासी समाज को ही थाने से धक्का देकर बाहर निकाल दिया जाता है।

यही है कोण्डागांव के श्यामपुर एकलव्य विद्यालय की पूरी कहानी, जो अब थाने के घेराव तक पहुंच गई है। कोण्डागांव जिला के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय श्यामपुर में अव्यवस्थाओं की जांच के बाद  देर रात मामला गरमा गया। जांच में सामने आई कथित खामियों और विद्यालय परिसर में सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर आदिवासी समाज और पालकों में नाराजगी बढ़ गई। देर शाम तक विद्यालय के सामने सड़क पर बैठे पालक, परिजन और सामाजिक जन शिकायत दर्ज कराने अनुसूचित जाति-जनजाति (अजाक) पुलिस थाना पहुंचे। इसी दौरान थाने में भीड़ बढऩे के बाद घेराव और हंगामे की स्थिति बन गई।

शुरुआत शिक्षिका के आत्महत्या प्रयास से

ये मामला 10 अक्टूबर को सामने आया, जब विकासखंड माकड़ी स्थित संयुक्त एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय श्यामपुर में पदस्थ पीजीटी कंप्यूटर साइंस की शिक्षिका प्रियंका परिहार ने फिनाइल पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

घटना के बाद शिक्षिका स्वयं पैदल जिला अस्पताल पहुंचीं, जहां उनका उपचार जारी है। उन्होंने विद्यालय प्रशासन पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के गंभीर आरोप लगाए।

मामले की जानकारी मिलने पर शनिवार को संबंधित विभाग के अधिकारियों ने जिला अस्पताल पहुंचकर शिक्षिका से मुलाकात की और शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन शिक्षिका का ये कदम सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं था, ये उस अव्यवस्था की तरफ पहला इशारा था जो अंदर ही अंदर सड़ रही थी।

31 अक्टूबर को फूटा गुस्सा, फिर बनी जांच समिति

31 अक्टूबर को शिक्षिका के समर्थन में छात्र, पालक और सामाजिक जनों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नूपुर राशि पन्ना ने विद्यार्थियों और पालकों से मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला स्तरीय जांच समिति गठित की।

समिति ने 3 नवंबर को विद्यालय के कन्या और बालक छात्रावास का निरीक्षण किया। और जो सामने आया, उसने सबको हिला दिया।

जांच में क्या-क्या मिला? कीड़े वाला राशन, टूटे शौचालय, चूहों के बिल

कन्या छात्रावास में –

अनाज और राशन सामग्री में कीड़े मिले। कुछ खाद्य सामग्री की उपयोग अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। शौचालयों में गंदगी के साथ दरवाजे टूटे हुए मिले। कई नल खराब होने के कारण लगातार पानी बह रहा था। छात्रावास में मरम्मत का काम भी चल रहा था। परिसर में लगा सैनिटरी पैड बर्नर भी खराब स्थिति में मिला।

बालक छात्रावास में –

यहां भी रखे अनाज और राशन में कीड़े पाए गए। व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। निरीक्षण के दौरान संस्था की प्राचार्य मौजूद थीं।

चार कमरे सील, प्राचार्य और अधीक्षकों को हटाया

जांच के दौरान कुछ कमरों में संदिग्ध सामग्री होने की आशंका के चलते समिति ने नायब तहसीलदार की मौजूदगी में चार कमरों को सील कर दिया।

जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्राचार्य चंद्रकिरण तिवारी को संस्था के सभी प्रभारों से हटा दिया गया है। कन्या और बालक छात्रावास के अधीक्षकों को भी संस्था के कार्यों से पृथक कर दिया गया है। शासन ने नए प्राचार्य की नियुक्ति भी कर दी है।

जांच के बाद छात्रावासों की व्यवस्था में सुधार और निगरानी के लिए पालक समिति गठित करने की अनुशंसा भी की गई है।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष ने जांच के दौरान 30 से 35 बिंदुओं पर खामियां मिलने और करीब छह कमरों को सील किए जाने का दावा किया था।

फिर क्यों गरमाया मामला? सील और सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

जांच के बाद मामला शांत होना चाहिए था, लेकिन यहीं से दूसरा विवाद शुरू हुआ।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष पनकू राम नेताम ने आरोप लगाया कि 31 अक्टूबर को विद्यालय में सील लगाने की बात कही गई थी, लेकिन जांच दल के निरीक्षण के दौरान छात्रावास सील नहीं मिले। उन्होंने दावा किया कि एक दिन पहले परिसर में छेड़छाड़ कर साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

नेताम के अनुसार, इसी मामले में पूरे आदिवासी समाज के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी से आहत होकर समाज के लोग अजाक थाने में शांतिपूर्वक आवेदन देने पहुंचे थे।

देर रात अजाक थाने का घेराव, पुलिस और समाज आमने-सामने

देर शाम तक विद्यालय के सामने सड़क पर बैठे पालक, परिजन और सामाजिक जन शिकायत दर्ज कराने अनुसूचित जाति-जनजाति (अजाक) पुलिस थाना पहुंचे। इसी दौरान थाने में भीड़ बढ़ने के बाद घेराव और हंगामे की स्थिति बन गई।

पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश देकर परिसर से बाहर किया। घटना के बाद देर रात तक प्रदर्शनकारी थाने के पास बैठे रहे।

दो पक्ष, दो दावे

आदिवासी समाज का आरोप –

पनकू राम नेताम ने आरोप लगाया कि एसपी के पहुंचने पर आदिवासी समाज के पदाधिकारियों और महिला पदाधिकारी सहित लोगों को धक्का देकर बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि इस घटना से समाज का पुलिस और प्रशासन पर भरोसा टूट गया है।

उन्होंने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्रामसभा की भूमिका का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब प्रशासन से ही न्याय की उम्मीद नहीं रहेगी तो समाज किसके पास जाएगा।

पुलिस का पक्ष –

इधर एसपी पंकज चंद्रा ने बताया कि अजाक थाने के घेराव की स्थिति बनने पर वे मौके पर पहुंचे और लोगों से चर्चा कर उन्हें परिसर से बाहर किया गया। उन्होंने कहा कि परिसर में पुलिसकर्मियों के परिवारों के आवास भी हैं, जहां घटना के दौरान दहशत का माहौल बन गया था।

एसपी के अनुसार, 100 से अधिक लोग थाना परिसर में घुस गए थे और वहां तोड़फोड़ की गई। पुलिस नुकसान का पंचनामा तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित लोगों से कहा गया है कि पीड़ित और आवेदक थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, जिसके बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

एसपी ने कहा कि वे करीब 40 मिनट तक मौके पर बैठकर आवेदकों का इंतजार करते रहे, लेकिन उस समय तक कोई पीड़ित या आवेदक सामने नहीं आया था। उन्होंने पुलिसकर्मियों के परिजनों के नुकसान के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही।

अब आगे क्या?

हालांकि, जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और थाने में हुई घटना के संबंध में पुलिस की विस्तृत जांच सामने आना बाकी है। दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आगे की कार्रवाई के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

लेकिन एक बात साफ है – एक शिक्षिका के आत्महत्या के प्रयास ने उस अव्यवस्था की परत खोली है, जो आदिवासी बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। अब सवाल ये है कि क्या जांच सिर्फ प्राचार्य हटाने तक रुकेगी, या उन बच्चों को सच में साफ खाना, साफ शौचालय और सुरक्षित छात्रावास मिलेगा।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. एकलव्य विद्यालय श्यामपुर का मामला क्या है?

शिक्षिका प्रियंका परिहार के आत्महत्या प्रयास के बाद जांच में छात्रावासों में कीड़े वाला राशन, एक्सपायरी खाना, गंदगी और टूटे शौचालय जैसी अव्यवस्था मिली।

Q2. शिक्षिका ने आत्महत्या का प्रयास क्यों किया?

उन्होंने विद्यालय प्रशासन पर मानसिक प्रताड़ना और विद्यार्थियों को सुविधाएं न देने के आरोप लगाए थे।

Q3. जांच में क्या कार्रवाई हुई?

चार कमरे सील किए गए, प्राचार्य चंद्रकिरण तिवारी को सभी प्रभारों से हटाया गया, दोनों छात्रावास अधीक्षकों को भी हटाया गया, नए प्राचार्य की नियुक्ति हुई।

Q4. अजाक थाने का घेराव क्यों हुआ?

सील और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप और समाज के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी से आहत होकर समाज के लोग शांतिपूर्वक आवेदन देने थाने पहुंचे थे।

Q5. पुलिस का क्या कहना है?

एसपी पंकज चंद्रा के अनुसार 100 से अधिक लोग थाना परिसर में घुस गए, तोड़फोड़ हुई, नुकसान का पंचनामा तैयार किया जा रहा है।

Q6. आदिवासी समाज का क्या आरोप है?

समाज के पदाधिकारियों और महिला पदाधिकारी सहित लोगों को धक्का देकर बाहर निकाला गया, जिससे पुलिस-प्रशासन पर भरोसा टूट गया।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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