टीआरपी डेस्क। धमतरी जिले में फर्जी डिग्री और अंकों में हेराफेरी कर शिक्षक बनने के मामले में करीब 18 साल बाद बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मगरलोड और नगरी विकासखंड में पदस्थ 8 प्रधानपाठकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने 6 जनवरी को इसका आदेश जारी किया। बर्खास्त किए गए शिक्षकों में 6 मगरलोड ब्लाक और 2 नगरी ब्लाक से हैं, जो सभी प्राथमिक शालाओं में प्रधानपाठक के पद पर कार्यरत थे।
यह मामला वर्ष 2007–08 में जनपद पंचायत क्षेत्रों में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती से जुड़ा है। उस समय बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों में हेराफेरी कर नौकरी हासिल की थी। लंबे समय तक यह मामला दबा रहा, लेकिन एक आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज जुटाकर इसकी शिकायत की, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
जांच के दौरान सामने आया कि कुछ शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और सितंबर महीने में कुछ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। वहीं, कई आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिकाएं भी दाखिल की थीं। लोक आयोग से निर्देश मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए आठ प्रधानपाठकों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
डीईओ अभय कुमार जायसवाल के अनुसार, मगरलोड ब्लाक में वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। शिकायत के आधार पर जांच चली और अलग-अलग क्षेत्रों में पदस्थ कुल 18 शिक्षकों के खिलाफ छत्तीसगढ़ लोक आयोग में प्रकरण दर्ज हुआ। इन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश से जुड़ी धाराओं सहित एसटी-एससी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
पूरा मामला धमतरी जिले में 2007–08 के दौरान 150 पदों के लिए हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-03 की भर्ती से जुड़ा है, जिसमें तय संख्या से अधिक 172 नियुक्तियां कर दी गई थीं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा मगरलोड ब्लाक के ग्राम चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने किया था। आरटीआई से दस्तावेज हासिल कर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद 27 सितंबर 2011 को एफआईआर दर्ज हुई और जांच शुरू हुई।



