रायपुर। प्रधानमंत्री के खिलाफ सवाल पूछने के मामले में फंसे विनोद तिवारी के लिए आज राहत भरी खबर आई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद उन्हें जमानत मिल गई है। बता दें कि इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से ही पूरे देश की नजरें दिल्ली की अदालत पर टिकी थीं।

कौशांबी में हुई थी नाटकीय गिरफ्तारी दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्म की तरह रहा। जानकारी के अनुसार, विनोद तिवारी छत्तीसगढ़ से उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। खुशी का माहौल था, लेकिन तभी दिल्ली पुलिस की टीम ने वहां दबिश दे दी। सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें वहीं से हिरासत में ले लिया और दिल्ली ले आई। 13 मार्च 2026 को हुई इस गिरफ्तारी के बाद से ही कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई थी।

कोर्ट में वकीलों की जबरदस्त दलीलें पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान विनोद तिवारी की ओर से नामी वकील मयंक जैन और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। ग्राउंड सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के सामने मजबूती से दलील रखी कि केवल सवाल पूछना कोई अपराध नहीं है। वकीलों के तर्कों और मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय अदालत ने विनोद तिवारी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

विनोद तिवारी की अचानक गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई थी। सोशल मीडिया पर लोग लगातार इस गिरफ्तारी को लेकर अपनी राय रख रहे थे।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।