टीआरपी। Dr. Mohan Bhagwat : राजधानी के प्रसिद्ध वीआईपी रोड स्थित श्री राम मंदिर परिसर में गुरुवार को सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत में सर्वत्र लोग अपनी-अपनी आस्था और आचरण के साथ सद्भाव के कारण एक साथ रहते हैँ।. घर का काम करने वाले नौकर को भी उस घर के बच्चे चाचा कहते हैँ। उसे पूरा सम्मान देते हैँ, यह सद्भाव कई वर्षों से चला आ रहा है। सामाजिक सद्भाव से देश में अनेक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

मोहन भागवत ने कहा कि ब्रिटिश लोग स्वेच्छा से भारत से नहीं गए हैँ। हमारे लोगों ने एकजुट होकर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। अपनी एकता और अखंडता के कुछ तंतुओं को हम भूल गए, इसलिए दृष्टि में भेद आ गया था। अंग्रेजों को हमारी एकता अच्छी नहीं लगी तो उन्होंने इसकी भी व्यवस्था कर दी कि बाद में भी भारत में हमारे बीच में भेद रहे लेकिन उनके प्रयासों को हमने समय-समय पर असफल किया। अपनी-अपनी विशिष्टता के साथ आगे बढ़ने की अपने यहाँ पूर्ण स्वतंत्रता है, दूसरे का भी सम्मान करें. जहाँ सद्भावना पक्की है, वहाँ बिगाड़ने वालों की नहीं चलेगी। तोड़ने वाली शक्तियाँ असफल हों इसके लिए हमें प्रयास करना है। कुछ न कुछ अपनी-अपनी चुनौतियाँ भी हैँ. प्रत्येक समाज की आकांक्षाएं हैँ. हम सब अपनी-अपनी विविधता को संभाल कर रखते आए हैँ. किसी की अस्मिता समाप्त नहीं हुई। हम समाज और राष्ट्र के नाते एक हैँ, उसके पीछे सामाजिक सद्भाव है।

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मोहन भागवत ने कहा कि भारत में आकर भी भारत की रीति में कुछ लोग नहीं रहते हैँ, इसलिए वह आक्रमण करते हैँ. हम चिंतित हैँ लेकिन हमें और चिंतित होना चाहिए। हम सब एक दूसरे को पकड़कर चलें, जहां समाज में संगठन और सद्भावना है वहाँ वह असफल हो जाते हैँ. यह जानकारी बताने से ही जाएगी। लव जिहाद, मतांतरण, व्यसन आदि पर प्रबोधन करना होगा. अकेलेपन की भावना व्यसन की ओर धकेलती है।

मित्र, कुटुंब बनाएं

भागवत ने कहा कि हमारे बीच के जो लोग दुर्बल या वंचित हैँ, उनके सशक्तिकरण के लिए कुछ कर सकते हैं। क्या. हर बैठक में तय करके आगे बढ़ना. हम समर्थ हैँ तो हमारा सामर्थ्य उनके उपयोग में आना चाहिए। हमारा पूरा समाज एक है, जाति पंथ उसके अंग है, जिस प्रकार पूरा शरीर एक है, इसी तरह हमारी पृथक आस्था व आचरण होने के बाद भी हमारी अस्मिता एक हैँ। हम अपनी जाति बिरादरी की उन्नति के लिए क्या करते हैँ, इसके बाद एक बड़ा समाज है उसकी उन्नति के लिए क्या कर सकते हैँ. हम सभी जाति, पंथ बिरादरी मिलकर जिस क्षेत्र में निवास करते हैँ उसकी उन्नति के लिए क्या कर सकते हैँ. यह साझा विचार करना चाहिए. हर समाज में हमारे मित्र हों, मित्र कुटुंब बनाएं।

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परिवार के बीच समाज, देश की बात करें

भागवत ने कहा कि घर में कुटुंब प्रबोधन करें.। सप्ताह में एक दिन निश्चित करें और सब लोग एकत्र हों. भजन आदि करें। घर में बना भोजन मिलकर करना. उसके बाद चर्चा करना. हमारी कुल रीति क्या है। हमारे पूर्वज कौन थे, उनकी विशेषता क्या थी, हम उनके संस्कार को कितना मानते हैँ। कुछ कमी है तो उसे दूर करना। परिवार के बीच देश की चर्चा करें। देश में क्या अच्छी चीज़ें हैँ क्या चुनौती हैँ. ऐसे विषयों पर सहमति बनाएं तभी उन्हें लागू करें। ऐसा मंगल संवाद सप्ताह में एक दिन करना चाहिए. इसी तरह समाज के कार्य में मैं कितना समय दे सकता हूँ, यह तय करंें।

पर्यावरण की रक्षा करें

भगवत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का विषय है. पानी बचाइए, प्लास्टिक का उपयोग कम करें. पेड़ लगाइए। यह कार्य तो हम सब व्यक्तिगत स्तर पर कर सकते हैँ।

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मातृभाषा में बात करें

भागवत ने कहा कि यह तय करें कि घर में अपनी भाषा बोलेंगे, कोई एक भारतीय भाषा सीखेंगे.. अपने घर में मातृभाषा में बातचीत करना तथा अपना वेश पहनना चाहिए। अपने घर में अपने आदर्श, महापुरुष, संत की फोटो होनी चाहिए। देश दुनिया में भ्रमण करना चाहिए किन्तु अपने आसपास कि झुग्गी में भी कभी कभार जाना, वह भी अपना है।

संविधान की जानकारी रखें

संविधान में प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, नागरिक कर्तव्य, नीति निर्देशक तत्व बताए गए हैँ। सभी को इसकी जानकारी होनी चाहिए. देश के सभी नियम क़ानून का पालन करना चाहिए। कुछ बातें लिखित नहीं होती, लेकिन वह सामाजिक मूल्य हैँ। बड़े बुजुर्गों का बच्चे सम्मान करें। उससे विनम्रता आती है, यह सब करने से समाज में सद्भावना बढ़ती है। समाज में आपस में सहयोग बढ़े। इसका प्रयास प्रत्येक समाज को करना चाहिए। खंड स्तर पर यह प्रयास हो इस दिशा में सक्रिय हों।

पंगत में किया भोजन

इस अवसर पर विविध जाति, पंथ और समाजों के प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने पंगत में भोजन किया। सद्भाव बैठक की प्रस्तावना मध्यक्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना ने प्रस्तावना एवं प्रान्त संघचालक टोपलाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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