गरियाबंद । उदंती अभ्यारण्य (Udanti Sanctuary) में मादा वनभैंसा (female bison)‘‘खुशी’’(khushi) ने ‘‘पाड़ा’’(calf) को जन्म दिया है। इससे अब छत्तीसगढ़ में राजकीय पशुआे(state animal) की तादाद बढ़कर 12 हो गई। नर बच्चे(male calf) के जन्म से जहां पशु प्रेमियों को खुशी मिली तो वहीं विशेषज्ञों की टीम(team of experts) को खासी निराशा हाथ लगी है। यहां हम आपको ये भी बता दें कि छत्तीसगढ़ के उदंती अभ्यारण्य (Udanti Sanctuary) में अब प्रजनन के लायक महज एक ही मादा वन भैंसा बची हुई है। जो दूसरी मादा वन भैंसा आशा(female bison Asha) है वो अब बूढ़ी हो चली है। ऐसे में ‘‘खुशी’’ के ऊपर ही तमाम विशेषज्ञों की उम्मीद लगी हुई थी कि अगर इसने मादा बच्चे को जन्म दे दिया तो वनभैंसों की वंशवृध्दि का एक और रास्ता खुल जाएगा।

जन्म लेने के बाद ही मां से खेलने लगा बच्चा:
शायद इसी को प्रकृति का खेल कहते हैं कि जन्म लेने के कुछ देर बाद ही पाड़ा अपनी मां ‘‘खुशी’’ से खेलने लगा। उसकी अटखेलियां देखकर वहां मौजूद तमाम लोग खुश हुए। तो वहीं ‘‘खुशी’’ के खाने-पीने का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।

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दिल्ली से आई थी विशेषज्ञों की टीम:
वनभैंसा खुशी का प्रसव दिल्ली से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने कराया। टीम को निराशा जरूर हुई है पर उसने उम्मीद नहीं छोड़ी है। इस टीम को उम्मीद है कि अगली बार ‘‘खुशी’’ उनकी परीक्षाओं पर खरी उतरेगी और वो मादा बच्चे को जन्म देगी।

वनभैंसों का वंश बढ़ाने की कोशिशें जारी:
छत्तीसगढ़ में वनभैंसों की वंशवृध्दि में लगी सरकार के प्रयासों को लगातार झटका लग रहा है। यही कारण है कि खुशी को करनाल से यहां लाया गया है। उसको लेकर यहां विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि इस बार वो किसी मादा बच्चे को जन्म देगी जबकि ऐसा नहीं हुआ। ये खुशी का प्रथम प्रसव था। इसके बाद भी विशेषज्ञों की टीम उसकी लगातार निगरानी करेगी।

लगातार घट रही वन भैंसों की तादाद:
दुनिया में वन भैंसों की तादाद लगातार कम होती जा रही है। एशियाई जंगली भैंसा की संख्या आज 4000 से भी कम बताई जा रही है। एक सदी पहले तक पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में बड़ी तादाद में पाये जाने वाला जंगली भैंसे आज केवल भारत, नेपाल, बर्मा और थाईलैंड में ही पाए जाते हैं। भारत में काजीरंगा और मानस राष्ट्रीय उद्यान के अलावा ये मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में रायपुर संभाग और बस्तर में पाया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार इसके संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास कर रही है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।