कोटा/बिलासपुर। जिले के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। यहां हुई जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने इसे पर्यावरण, खेती, शिक्षा, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बताया। जनसुनवाई में तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने बाहरी लोगों पर दबाव और धमकी देने का आरोप भी लगाया।

जन सुनवाई स्थगित करने की मांग की थी

जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर इसे स्थगित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि जब तक कानूनी, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा नहीं होती, प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।

ग्राम पंचायत की सहमति बिना प्रक्रिया: ग्रामीण

ग्रामीणों का आरोप है कि मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्रा. लि. जिस जमीन पर वाशरी बनाना चाहती है, वह कृषि कार्य के लिए खरीदी गई थी। अब उसका औद्योगिक इस्तेमाल नियमों के खिलाफ है।

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अमाली क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है और यहां पेसा अधिनियम लागू है। ऐसे में ग्राम सभा और पंचायत के विशेष अधिकार हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की सहमति और अधिकारों की अनदेखी कर परियोजना बढ़ाई जा रही है।

महाविद्यालय पर असर का डर

प्रस्तावित साइट से करीब 200 मीटर दूर शासकीय महाविद्यालय है। ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग शुरू होने से धूल, शोर और भारी वाहनों से शैक्षणिक माहौल बिगड़ेगा। छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर असर पड़ेगा।

अचानकमार टाइगर रिजर्व को खतरा

क्षेत्रवासी बोले कि परियोजना स्थल अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रभाव क्षेत्र के पास है। वाशरी से प्रदूषण, औद्योगिक गतिविधियां और परिवहन दबाव वन्यजीवों और पर्यावरण संतुलन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह इलाका जैव विविधता के लिहाज से संवेदनशील है। यहां प्रदूषणकारी उद्योग गंभीर नतीजे ला सकता है।

खेती और सेहत पर संकट

ग्रामीणों ने कहा कि वाशरी से निकलने वाली धूल और अपशिष्ट जल खेती की जमीन खराब कर सकते हैं। मिट्टी की उर्वरता और फसल की पैदावार घट सकती है। वायु प्रदूषण से सांस की बीमारियां बढ़ने की आशंका है। 

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यहां की बड़ी आबादी खेती और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। उद्योग से आजीविका और पर्यावरण दोनों पर असर पड़ेगा।

जनसुनवाई में हंगामा, बाहरी लोगों पर आरोप

विरोध के बीच माहौल गरमा गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोगों ने हंगामा किया और विरोध करने वालों को डराया-धमकाया। दावा है कि परियोजना के समर्थन में कोरबा और अंबिकापुर से लोगों को बुलाया गया था। लेकिन ग्रामीण एकजुट रहे और आपत्ति दर्ज कराई।

हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने साफ किया कि पर्यावरण, खेती और जनस्वास्थ्य से समझौता नहीं होगा। आपत्तियों को नजरअंदाज कर परियोजना बढ़ी तो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट भी जाएंगे।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जनभावना, संवैधानिक प्रावधानों और पर्यावरण चिंताओं को देखकर परियोजना पर फिर से विचार करने की मांग की है। लोगों ने कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।

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