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Raipur: अब PDS चावल की बोरियां QR कोड से होंगी ट्रैक, क्या कालाबाजारी पर लग सकेगी रोक ?

PDS rice bags to be tracked via QR codes: PDS याने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और चोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा के तहत चावल की बोरियों पर QR Code Tagging की व्यवस्था शुरू की है। इससे मिलर से लेकर लाभार्थी तक पूरा सफर ट्रैक होगा। बताया जा रहा है कि […]

Raipur: अब PDS चावल की बोरियां QR कोड से होंगी ट्रैक, क्या कालाबाजारी पर लग सकेगी रोक ?
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

PDS rice bags to be tracked via QR codes: PDS याने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और चोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा के तहत चावल की बोरियों पर QR Code Tagging की व्यवस्था शुरू की है। इससे मिलर से लेकर लाभार्थी तक पूरा सफर ट्रैक होगा।

बताया जा रहा है कि बोरी पर लगे QR कोड को स्कैन करते ही मिलिंग सीजन, खरीद एजेंसी का नाम, संबंधित खरीद केंद्र जैसी सभी जानकारियां सामने आ जाएंगी। अक्सर PDS चावल की कालाबाजारी और दोबारा सिस्टम में रीसायकल की शिकायतें आती हैं।

वेयरहाउस और राशन दुकान पर रैंडम स्कैनिंग, POS से डिजिटल बिल

वेयरहाउस और राशन दुकानों पर रैंडम स्कैनिंग से गड़बड़ी रोकी जाएगी। POS मशीन से QR स्कैन होते ही डिजिटल बिल जनरेट होगा, सब्सिडी का हिसाब पारदर्शी रहेगा। राशन दुकानों में लगी पॉइंट ऑफ सेल मशीनों के जरिए इस QR कोड को स्कैन किया जाएगा, जिससे सीधे डिजिटल बिल जनरेट होगा और सब्सिडी का हिसाब भी पारदर्शी रहेगा।

सप्लाई के वक्त ही चिपकाया जायेगा QR कोड

बताया जा रहा है कि मिलर के सप्लाई के वक्त ही यह कोड बोरियों पर चिपकाया जाएगा। इससे पीडीएस चावल में होने वाले हेराफेरी के ‘रोलिंग खेल’ पर रोक लगेगी और चावल की सप्लाई को ट्रैक किया जा सकेगा।

इससे चावल की सप्लाई को ट्रैक किया जा सकेगा और बीच रास्ते में चावल बदलने या हेरफेर की आशंका पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

मप्र में लागू, छत्तीसगढ़ में दिसंबर से तैयारी

यह व्यवस्था मप्र में लागू कर दी गई है और छत्तीसगढ़ में खाद्य विभाग दिसंबर से शुरू करने की तैयारी में है। चावल की आपूर्ति में हेरफेर रोकने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

चावल वापस पहुंचता है मिलों में

छत्तीसगढ़ में सरकारी राशन दुकानों में मिलने वाले चावल की बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी हो रही है। अधिकांश दुकानों में विक्रेता(सेल्समैन) उपभोक्ताओं को चावल देने की बजाय कुछ पैसे पकड़ा देते हैं। इसके बाद वही चावल सिंडिकेट के जरिये वापस राइस मिलर के पास पहुँच जाता है। इस तरह चावल की रोलिंग करके अफरा-तफरी की जाती है। माना जा रहा है कि QR कोड की व्यवस्था करने से इस तरह की हेराफेरी पर कुछ हद तक रोक लगेगी। हालांकि अफरा-तफरी करने वाला सिंडिकेट इसका भी कुछ न कुछ तोड़ निकाल ही लेगा।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. नई व्यवस्था क्या है?
— PDS चावल की बोरियों पर QR कोड टैगिंग से डिजिटल ट्रैकिंग।

Q2. QR स्कैन से क्या पता चलेगा?
— मिलिंग सीजन, खरीद एजेंसी, खरीद केंद्र की जानकारी।

Q3. इससे क्या रुकेगा?
— कालाबाजारी, रीसायकल, रोलिंग खेल और बीच रास्ते में चावल बदलने की हेराफेरी।

Q4. स्कैनिंग कहां होगी?
— वेयरहाउस और राशन दुकानों पर रैंडम स्कैनिंग, POS मशीन से डिजिटल बिल।

Q5. कहां लागू हुई?
— मप्र में लागू, छत्तीसगढ़ में दिसंबर से शुरू होने की तैयारी।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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