0 उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा- छत्तीसगढ़ में घुसपैठियों के खिलाफ जारी है कार्रवाई

0 मुस्लिम समाज ने कहा- समाज विशेष और क्षेत्र विशेष के लोगों को किया गया टारगेट, जिन्होंने थानों में दे दी है सूचना उन्हें भी किया गया परेशान

रायपुर। प्रदेश में चल रहे नगरीय निकाय चुनाव के बीच राजधानी रायपुर के 21 शहरी थाना क्षेत्रों में दूसरे राज्यों से आकर रह रहे लोगों के लिए पुलिस धर-पकड़ अभियान चलाया। पुलिस ने इसे “ऑपरेशन समाधान” नाम दिया। इस दौरान दो हजार से अधिक लोग पकड़ में आये। इनमें अधिक संख्या पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों के लोगों की थी। इन सभी लोगों का पुलिस ने आधार कार्ड का वेरिफिकेशन किया है। जिन्होंने पूर्व में अपना वेरिफिकेशन नहीं कराया था उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।

पुलिस लाइन में लगा मजमा

आज राजधानी स्थित पुलिस लाइन में सुबह से ही पुलिस की गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। विभिन्न थाना क्षेत्रों से बसों में भरकर लोगों को लाकर एक जगह एकत्र किया जा रहा था। पूछने पर पता चला कि राजधानी के 21 शहरी थाना क्षेत्रों में अभियान चलाकर बाहर से आकर रह रहे लोगों को पकड़ा गया है। सभी के एक-एक करके पूछताछ और उनके रायपुर में रहने, काम करने और बाकी पहलुओं को लेकर पूछताछ की गई।

छापेमार कार्यवाही के दौरान विभिन्न राज्यों जिनमें पश्चिम बंगाल के 394, उत्तर-प्रदेश के 571, बिहार के 320, ओडिसा के 184, महाराष्ट्र के 110, मध्य-प्रदेश के 273, राजस्थान के 54, जम्मू-कश्मीर के 04, झारखण्ड के 71, नागालैण्ड के 01, गुजरात के 17, नेपाल के 07 एवं दिल्ली के 07 निवासियों सहित कुल 2013 व्यक्तियों को रक्षित केन्द्र लाया गया।

अनजान लोगो की आवाजाही की मिल रही थी सूचना : SSP

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उम्मेद सिंह ने इस कार्रवाई के बारे में बताया कि काफी समय से शिकायत मिल रही थी कि शहर के अनेक इलाकों में संदिग्ध और अनजान लोग घूम रहे हैं। इनके वेरिफिकेशन की बात थी। वहीं कुछ घरों में अनजान लोगों के रहने की सूचना भी थी। इनमें से कई लोग ठेले, खोमचे और फेरी वाले हैं। इनमें से जिन लोगों ने अपना वेरिफिकेशन नहीं कराया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। SSP से जब पूछा गया कि इनमे से अधिकांश लोगों ने थानों में आमद दर्ज करा दी है और वेरिफिकेशन फॉर्म भी भर दिया है, तब उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपना वेरिफिकेशन करा रखा है, उनको भी पूछताछ के लिए पुलिस तलब कर सकती है, पुलिस का मकसद इन्हे परेशान करना नहीं है।

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SSP ने बताया कि दूसरे राज्य से आकर रहने वाले लोगों की जानकारी संबंधित राज्यों में भेजी जाएगी। मुसाफिर रोल भेजा जाएगा, क्रिमिनल रिकॉर्ड या उनकी कोई हिस्ट्री वहां रही है या नहीं, जानकारी मांगी जाएगी। कोई संदेही गतिविधियों में पाया जाता है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

थानों में वापस भेजा गया सभी को

पुलिस ने बताया कि इस अभियान के दौरान कुल 2013 लोगों को पकड़ा गया। पुलिस लाइन में लाकर इन सभी की तस्वीरें ली गई और इनके आधार कार्ड का वेरिफिकेशन किया गया। यहां से इन सभी को जिन थाना क्षेत्रों से लाया गया था, वहीं इन्हें बसों में भरकर वापस ले जाया गया। बाद में पता चला कि जिन लोगों ने थानों में आमद दर्ज कराते हुए वेरिफिकेशन नहीं कराया है। ऐसे 224 संदिग्ध व्यक्तियों के विरूद्ध शहर के संबंधित थानों में प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्यवाही किया गया

मुस्लिम समाज ने की कार्रवाई की निंदा

बता दें कि पुलिस के इस अभियान में अधिकांश मुस्लिम समाज के लोग ही पकड़े गए हैं। इनमें से कुछ ही लोग गैर मुस्लिम थे। यही वजह थी कि इस मौके पर मुस्लिम समाज के कुछ प्रमुख लोग पुलिस लाइन में मौजूद थे। इन्हीं में शामिल सामाजिक कार्यकर्त्ता नोमान अकरम और बिरगांव नगर पालिका के मेयर इन कॉउन्सिल इकराम अहमद ने कहा कि इस कार्रवाई में समाज विशेष और क्षेत्र विशेष के लोगों को टारगेट किया गया है। पकड़े गए लोगों में कुछ को छोड़कर लगभग सभी मुस्लिम समाज के हैं, वही इनमें से अधिकांश बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के रहने वाले है। इकराम अहमद ने कहा कि इनमें से अधिकांश लोगों ने थानों में वेरिफिकेशन करवा लिया है, बावजूद इसके उन्हें पकड़ कर यहां लाया गया। इस तरह की कार्रवाई अनुचित है। उन्होंने कहा कि ऐन चुनाव के समय माहौल बनाने के लिए पुलिस ने सरकार के कहने पर ऐसा किया है। आलम यह था कि मुस्लिम समाज के कुछ लोग काम के लिए यहां एक दिन पहले ही आकर होटल में रुके हुए थे, उन्हें भी पुलिस पकड़ कर ले आयी।

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‘संवैधानिक अधिकारों का हनन’

पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए हाई कोर्ट के अधिवक्ता मिर्जा हफीज बेग ने कहा कि देश के हर नागरिक को भारत के संविधान के अंतर्गत अधिकार दिया गया है कि वह देश के किसी भी कोने में निवास कर सकता है और व्यवसाय कर सकता है। राजधानी रायपुर में पुलिस ने चुनाव के वक्त समाज विशेष के लोगों को इस तरह पकड़ कर इनके मन में भय पैदा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अपने थाना क्षेत्रों में वेरिफिक्शन का काम कर सकती थी मगर इस तरह मजमा लगाकर इन सीधे-सादे और गरीब लोगों को डराया जा रहा है और पुलिस द्वारा ऐसा करके संविधान को चुनौती दी जा रही है। हफीज बेग ने कहा कि छत्तीसगढ़ से भी लाखों लोग दूसरे राज्यों में जाकर काम कर रहे हैं, उनके साथ तो इस तरह का व्यव्हार नहीं किया जा रहा है, जैसा यहां की सरकार कर रही है। उन्होंने इसे संविधान का हनन करार देते हुए इस मामले को हाई कोर्ट चुनौती देने की बात कही है।

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घुसपैठियों के खिलाफ जारी है कार्रवाई – अरुण साव

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पुलिस के इस अभियान को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ में घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। यहां अवैधानिक रूप से रह रहे लोगों के कारण समस्या पैदा होती है। ये कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा हैं। इनकी कोई आइडेंटिटी नहीं है, इसलिए प्रशासन इस मामले काे गंभीरता से लेकर कार्रवाई कर रहा है। साव ने कहा, जो भी छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।

क्या रोहिंग्या और बांग्ला देशियों की तलाश थी..?

चुनाव के वक्त राजधानी में की गई इस तरह की कार्रवाई को लेकर यह चर्चा रही कि पुलिस को यहां रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्ला देशियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिनके लिए यह सर्चिंग अभियान चलाया गया। हालांकि चर्चा इस बात की भी रही कि पुलिस को इस तरह मजमा लगाकर कार्रवाई करने की जरुरत क्यों पड़ी, क्योंकि इससे पहले पुलिस पहले भी कई बार थाना स्तर पर अभियान चला चुकी है, ऐसा इस बार भी किया जा सकता था।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।