Dipawali Diya: रोशनी और उल्लास के पर्व दीपावली पर हर साल माटी के दीये जलाने की परंपरा हमारे सांस्कृतिक वैभव को दर्शाती है। इस त्योहारी सीजन में रायपुर के स्थानीय कुम्हारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे आसानी से अपने हाथ के बने दीये बेच सकें, इसके लिए जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है।
राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने नगर निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहर के विभिन्न चुनिंदा और व्यस्त स्थानों पर कुम्हारों के लिए विशेष ‘पसरे’ (दुकान या स्थान) बनाए जाएं। इस पहल से पारंपरिक कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक निश्चित और सुरक्षित जगह मिल सकेगी।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की पहल से मिलेगी आजीविका
दीपावली के समय बाजारों में बढ़ती भीड़ और जगह की कमी के कारण कुम्हारों को अक्सर अपने दीये बेचने के लिए सड़क किनारे या दूर-दराज की जगहों पर भटकना पड़ता था। इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने प्रशासनिक अमले को सक्रिय कर दिया है।
कलेक्टर के इन निर्देशों के बाद नगर निगम द्वारा शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों के आसपास कुम्हारों के बैठने और सामान सजाने के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है। इससे कुम्हारों को अपनी आजीविका चलाने में काफी आसानी होगी और वे सम्मान के साथ अपने उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे।
नागरिकों से माटी के दीये खरीदने की विशेष अपील
प्रशासनिक स्तर पर की गई इस व्यवस्था के साथ-साथ जिला प्रशासन ने आम जनता से भी एक भावनात्मक अपील की है। कलेक्टर ने शहरवासियों से आग्रह किया है कि वे इस दीपावली पर चाइनीज या कृत्रिम लाइट्स के बजाय स्थानीय कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के शुद्ध दीये ही खरीदें।
जब आम नागरिक स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित कलाकृतियों और दीयों को अपनाते हैं, तो इससे कुम्हारों का व्यवसाय फलता-फूलता है और उनके घरों में भी सही मायनों में दीपावली की खुशियां आती हैं। यह छोटी सी पहल हमारे देश के पारंपरिक हुनरमंदों के लिए बहुत बड़ा संबल साबित होती है।
पारंपरिक कला को मिलेगा बढ़ावा और संरक्षण
हाथ से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाना भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का एक अहम हिस्सा है। आधुनिकता की दौड़ में कई बार ये पारंपरिक कलाएं विलुप्त होने की कगार पर पहुंच जाती हैं, लेकिन इस प्रकार के प्रशासनिक सहयोग से इन्हें नया जीवन मिलता है।
कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा है कि कुम्हारों को उनके उत्पादों के लिए उचित बाजार और स्थान उपलब्ध कराने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि हमारी सदियों पुरानी पारंपरिक कला को भी एक मजबूत बढ़ावा मिलेगा। यह पहल हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने की दिशा में एक अहम कदम है।
नगर निगम और प्रशासनिक अमला जुटा तैयारियों में
कलेक्टर के निर्देशों के मिलते ही रायपुर नगर निगम के अधिकारी और मैदानी अमला सक्रिय हो गया है। शहर में ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है जहां खरीदारों की आवाजाही अधिक होती है और कुम्हारों को भी व्यापार करने में सुविधा हो।
इन चिन्हित स्थानों पर साफ-सफाई, बैठने की हल्की व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि किसी भी कुम्हार भाई-बहन को अपनी आजीविका कमाने में कोई बाधा न आए। प्रशासन के इस त्वरित और संवेदनशील कदम की शहरभर में सराहना की जा रही है।
त्योहारों के सीजन में कुम्हारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
प्रशासन द्वारा दीये बेचने के लिए उचित स्थान सुनिश्चित किए जाने से कारीगरों का कहना है कि अब उन्हें जगह की चिंता नहीं सताएगी और वे पूरे उत्साह के साथ अपनी कला को बाजार में ला सकेंगे।



