टीआरपी। रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर मीनल चौबे ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग की सलाहकार समिति की बैठक में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नगर निगम एक जनसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है, इसलिए इसे व्यवसायिक (Commercial) दरों की श्रेणी से बाहर रखा जाना चाहिए।
रायपुर नगर निगम पर वर्तमान में बिजली बिल का भारी बोझ है। यदि बिजली की दरें कम होती हैं, तो निगम को होने वाली बचत का सीधा लाभ जनता को मिलेगा। इससे न केवल सफाई और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं के बजट में सुधार होगा, बल्कि भविष्य में यूजर चार्ज और संपत्ति कर में होने वाली संभावित वृद्धि से भी आम नागरिकों को राहत मिल सकेगी।
बैठक के दौरान महापौर ने तर्क दिया कि शहर की स्ट्रीट लाइट, वाटर पंप और सार्वजनिक शौचालयों पर कमर्शियल टैरिफ लगाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने विद्युत विभाग को ‘पब्लिक यूटिलिटी स्लैब’ बनाने का सुझाव दिया, जो कि घरेलू (Domestic) दरों के समान होना चाहिए। महापौर ने मांग की कि वर्तमान दर 7.35 रुपये प्रति यूनिट को घटाकर 5.10 रुपये प्रति यूनिट किया जाए।
महापौर ने नियामक आयोग के समक्ष चिंता जताई कि वर्तमान में रायपुर नगर निगम का बिजली बिल लगभग 300 करोड़ रुपये है, जिस पर 50 करोड़ रुपये का सरचार्ज भी जुड़ा हुआ है। इस भारी भरकम राशि के कारण निगम को नागरिक सेवाओं के बजट में कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को ग्रास सब्सिडाइजेशन श्रेणी से बाहर रखना शहर के विकास के लिए अनिवार्य है।
- वर्तमान मांग: बिजली दरों को 7.35 रुपये से घटाकर 5.10 रुपये प्रति यूनिट करना।
- वित्तीय बोझ: नगर निगम पर 300 करोड़ रुपये का बिजली बिल और 50 करोड़ रुपये का सरचार्ज लंबित।
- प्रस्तावित श्रेणी: व्यावसायिक दर के बजाय ‘पब्लिक यूटिलिटी स्लैब’ की मांग।
- प्रभावित सेवाएं: अधिक बिल के कारण सफाई, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी सेवाओं का बजट प्रभावित।
महापौर के इन सुझावों पर अब छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग विचार करेगा। यदि आयोग इन मांगों को स्वीकार करता है, तो रायपुर नगर निगम को सालाना करोड़ों रुपये की बचत होगी, जिससे शहर के विकास कार्यों को नई गति मिल सकेगी।


