Complaint letter submitted to Commissioner Medical Education Raipur regarding DRP scam
आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग रायपुर को सौंपी गई शिकायत की प्रति

Raipur Medical College DRP Scam: रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में एक बड़ा मामला सामने आया है। रायपुर मेडिकल कॉलेज डीआरपी घोटाले को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त से शिकायत की गई है। यह शिकायत 17 जुलाई 2026 को आयुक्त कार्यालय में दर्ज कराई गई है। इसमें कम्युनिटी मेडिसिन विभाग पर गंभीर अनियमितता के आरोप लगे हैं।

फर्जी हाजिरी और एनएमसी नियमों का उल्लंघन

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग यानी एनएमसी ने 29 दिसंबर 2023 को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनके अनुसार स्नातकोत्तर छात्रों के लिए डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम यानी डीआरपी अनिवार्य है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में इन नियमों का पालन नहीं किया गया। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार छात्रों की लॉगबुक ही विभाग में उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, नियमों के विपरीत छात्रों को जिला अस्पताल भेजने के बजाय कॉलेज में ही रखा गया। नतीजतन, जिला अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित हुईं।

छुट्टी के दिन भी हाजिरी

शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि फर्जी अटेंडेंस शीट बनाए गए हैं। इसके बाद, बिना सही सत्यापन के ही छात्रों को छात्रवृत्ति और वेतन बांट दिया गया। जांच में पाया गया कि 5, 12 और 19 जनवरी जैसे रविवार के दिनों में भी हाजिरी दर्ज है। इसके अलावा, 13 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश के दिन भी छात्र उपस्थित दिखाए गए हैं। यही वजह है कि शासन को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है।

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8 स्नातकोत्तर डॉक्टरों की सूची में सामने आई गड़बड़ी

आरटीआई दस्तावेजों में 2023 बैच के 8 स्नातकोत्तर डॉक्टरों की पोस्टिंग में गड़बड़ी उजागर हुई है। इनमें डॉक्टर विभा, डॉक्टर सेवा विभूति, डॉक्टर इक्षित और डॉक्टर माधवी शामिल हैं। इसके अलावा, डॉक्टर आशुतोष, डॉक्टर अर्जुमन, डॉक्टर शिवांगी और डॉक्टर रामकृष्ण के नाम भी इस सूची में दर्ज हैं। इन सभी छात्रों की डीआरपी पोस्टिंग में लॉगबुक और सत्यापन की कमी पाई गई है।

कांकेर मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप

कांकेर मेडिकल कॉलेज कम्युनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार पहले से ही वित्तीय अनियमितता के मामले में निलंबित चल रहे हैं। लेकिन, निलंबन के बावजूद उन्होंने अपना अटेंडेंस विभाग को भेजा है। शिकायतकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखने वाली बात होगी कि चिकित्सा शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।