Raipur News: रायपुर के उद्यमियों और निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) ने अब उद्योग लगाने के लिए सख्त नए नियम लागू कर दिए हैं। अब आप कहीं भी अपनी मर्जी से फैक्ट्री नहीं डाल पाएंगे। सरकार ने इसके लिए नया साइटिंग क्राइटेरिया जारी कर दिया है।

क्यों बदले गए नियम?

शहर के कई इलाकों में अक्सर फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को लेकर विवाद होता रहा है। कभी स्कूलों के पास तो कभी नदी के किनारे उद्योगों को लेकर लोग विरोध जताते हैं। अब इन समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए CECB ने कड़े कायदे तय कर दिए हैं। यह फैसला हवा और पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए लिया गया है।

इन जगहों से इतनी दूरी रखना होगा जरूरी

नए आदेश के मुताबिक, उद्योगों को आबादी और कुदरती स्रोतों से अब एक तय फासला रखना ही पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार, नियमों को अनदेखा करने पर पर्यावरणीय स्वीकृति मिलना मुश्किल होगा। दूरी के नियम कुछ इस तरह हैं।

  • आबादी, स्कूल, मंदिर और अस्पतालों से 500 मीटर की दूरी अनिवार्य।
  • इन संवेदनशील इलाकों से 200 मीटर की दूरी रखनी होगी।
  • यहां 100 मीटर की दूरी तय की गई है।
  • जंगल के करीब किसी भी तरह का उद्योग लगाने के लिए कम से कम 100 मीटर का अंतर होना जरूरी है।
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जल स्रोतों को बचाने की कवायद

नदियों और तालाबों के पास उद्योग लगाने वालों पर अब सख्ती बढ़ गई है। रेड श्रेणी के उद्योगों को सतही जल स्रोतों (बाढ़ क्षेत्र) से 500 मीटर दूर रहना होगा। ऑरेंज कैटेगरी के लिए यह दूरी 30 से 75 मीटर के बीच तय की गई है। शहर के बूढ़ा तालाब या खारून नदी के आसपास अब नई फैक्ट्रियां खोलना पहले जैसा आसान नहीं होगा।

क्या होगा असर?

जानकारों का मानना है कि इस कदम से भविष्य में होने वाले पर्यावरणीय विवादों में कमी आएगी। पहले स्थान चयन को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं था, लेकिन अब राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद यह एक ठोस कानूनी प्रक्रिया बन गई है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो अक्सर फैक्ट्रियों के प्रदूषण से परेशान रहते थे। अब नए उद्योगों की स्थापना के समय ही इन मानकों की सख्ती से जांच की जाएगी।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।