Raipur-Visakhapatnam Expressway: रायपुर से विशाखापट्टनम का सफर जल्द ही पहले के मुकाबले काफी आसान और तेज होने वाला है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी NH-130CD का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया गया है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 465 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को सीधे जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट है।
फिलहाल रायपुर से विशाखापट्टनम जाने के लिए पुराने मार्ग से करीब 597 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। दो-लेन वाले मार्ग और यातायात के कारण इस सफर में लगभग 12 से 14 घंटे तक लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद दूरी करीब 132 किलोमीटर कम होकर 465 किलोमीटर रह जाएगी। छह लेन के नए कॉरिडोर पर वाहनों के लिए बेहतर सड़क सुविधा और तेज रफ्तार का प्रावधान होगा। इससे रायपुर से विशाखापट्टनम पोर्ट तक का सफर लगभग 5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों के साथ माल परिवहन को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
16,482 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा कॉरिडोर
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर करीब 16,482 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया जा रहा है। इसका निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। करीब 465 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य मध्य भारत को पूर्वी और दक्षिणी समुद्री तट से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देना है। यह कॉरिडोर रायपुर से आगे ओडिशा के नबरंगपुर और कोरापुट होते हुए आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और विशाखापट्टनम क्षेत्र तक कनेक्टिविटी मजबूत करेगा। इसके जरिए उद्योग, व्यापार, परिवहन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
95 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा
प्रोजेक्ट का निर्माण 19 चरणों में किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ओडिशा के कोरापुट सेक्शन में निर्माण कार्य 95 प्रतिशत से अधिक पूरा होने की बात कही गई है। वहीं छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के हिस्सों में अंतिम चरण का काम, फिनिशिंग और इंटरचेंज निर्माण तेजी से चल रहा है। प्रोजेक्ट के बाकी हिस्सों को पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसियां अंतिम चरण के कार्यों पर जोर दे रही हैं। एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद तीन राज्यों के बीच सड़क परिवहन का नेटवर्क पहले की तुलना में काफी मजबूत हो सकता है।
पहाड़ी क्षेत्र में बन रही ट्विन टनल
इस कॉरिडोर की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा के पास बनाई जा रही करीब 2.79 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल है। यह हिस्सा पहाड़ी और वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। निर्माण के दौरान प्राकृतिक क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए टनल का निर्माण किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक एक तरफ की टनल का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी टनल पर भी काम जारी है। इस टनल के तैयार होने से पहाड़ी हिस्से में एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
दिल्ली और आगरा तक जुड़ेगा रायपुर
इस कॉरिडोर का महत्व केवल रायपुर और विशाखापट्टनम के बीच कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए यह देश के दूसरे प्रमुख हिस्सों से भी जुड़ने वाला है। NH-30, NH-34, NH-539 और NH-44 जैसे मार्गों के साथ कनेक्शन के जरिए रायपुर की पहुंच उत्तर और मध्य भारत के कई महत्वपूर्ण शहरों तक बेहतर हो सकती है। इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे और ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी मिलने पर रायपुर और विशाखापट्टनम का सड़क नेटवर्क दिल्ली, आगरा और ग्वालियर जैसे शहरों तक भी मजबूत होगा।
व्यापार और माल परिवहन को मिलेगा बड़ा फायदा
विशाखापट्टनम एक महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह क्षेत्र है। ऐसे में नए आर्थिक कॉरिडोर से छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों से बंदरगाह तक माल पहुंचाने में समय कम होने की उम्मीद है। उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए तेज सड़क संपर्क परिवहन लागत और समय दोनों को प्रभावित कर सकता है। इस कॉरिडोर के जरिए मध्य भारत और पूर्वी समुद्री तट के बीच सीधा सड़क संपर्क मजबूत होगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों और कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तथा बंदरगाहों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि निर्माण कार्य के अंतिम चरण में इंटरचेंज, टनल, फिनिशिंग और अन्य जरूरी काम पूरे किए जा रहे हैं। परियोजना पूरी होने के बाद रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच यात्रा का समय मौजूदा 12-14 घंटे से घटकर लगभग 5-6 घंटे होने की उम्मीद है। यह एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक तेज सड़क मार्ग नहीं, बल्कि मध्य भारत को दक्षिण और पूर्वी भारत के आर्थिक नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।


