Ramgopal Agarwal ED Raid: छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल एक बार फिर चर्चा में हैं। 20 अगस्त 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। धमतरी स्थित उनके आवास के अलावा रायपुर और अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
रामगोपाल अग्रवाल का नाम पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब और कोयला मामलों की जांच में सामने आता रहा है। जुलाई 2026 में EOW की कार्रवाई के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई और अगस्त में ED ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया।
1980 में कांग्रेस से जुड़े, संगठन में बनाई पहचान
रामगोपाल अग्रवाल ने वर्ष 1980 में कांग्रेस की राजनीति से जुड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वे लंबे समय तक पार्टी संगठन में सक्रिय रहे। वर्ष 2013 में उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने चुनावी राजनीति में सीधे तौर पर बड़ी भूमिका निभाने के बजाय संगठन के भीतर काम किया और पार्टी के वित्तीय एवं संगठनात्मक मामलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। यही वजह रही कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में उनका प्रभावशाली संगठनात्मक चेहरा माना जाता रहा।
कारोबार से भी रहा नाता
राजनीति के साथ रामगोपाल अग्रवाल का नाम कारोबारी गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। हालांकि, मौजूदा ED कार्रवाई का केंद्र उनके कथित कारोबारी नेटवर्क से ज्यादा शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल की जांच है। जांच एजेंसियां उनके संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और कथित घोटाले की रकम के स्रोत व इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। EOW ने भी पूछताछ के दौरान जब्त दस्तावेजों, डायरी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका की जांच की है।
शराब घोटाले में क्या है आरोप?
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2019 से 2022 के बीच कथित शराब घोटाले में एक संगठित सिंडिकेट के जरिए अवैध कमाई किए जाने का आरोप है। एजेंसी ने इस मामले में करीब 2,883 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित अवैध कमाई का एक हिस्सा राजनीतिक स्तर तक पहुंचाया गया। ED के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल उस समय प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे और कथित तौर पर घोटाले से जुड़ी नकदी के लेन-देन में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप और दावे हैं, जिनका अंतिम निर्धारण अदालत में होना बाकी है।
कोयला मामले में भी नाम आया
रामगोपाल अग्रवाल का नाम कथित 540 करोड़ रुपये के कोल लेवी मामले की जांच में भी सामने आया है। जुलाई 2026 में EOW ने उन्हें इस मामले में हिरासत में लिया था। एजेंसी उनकी कथित भूमिका, संबंधित लोगों से संपर्क और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
2023 की ED कार्रवाई के बाद फिर सुर्खियों में
रामगोपाल अग्रवाल इससे पहले भी ED की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। वर्ष 2023 में उनके कई ठिकानों पर जांच एजेंसी ने छापेमारी की थी। इसके बाद से वे लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे। जुलाई 2026 में EOW की कार्रवाई के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई और फिर शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने उन्हें गिरफ्तार किया।
अब 8 ठिकानों पर कार्रवाई से बढ़ी हलचल
20 अगस्त की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल से जुड़े परिसरों के अलावा उनके करीबियों से जुड़े कुछ ठिकानों पर भी जांच की गई। रायपुर, धमतरी और दुर्ग में अलग-अलग स्थानों पर ED की गतिविधियों की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसी की नजर कथित मनी ट्रेल, दस्तावेजों और रामगोपाल अग्रवाल से जुड़े लोगों के नेटवर्क पर है। आने वाले दिनों में तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जांच की दिशा को और स्पष्ट कर सकते हैं।


