STRAY DOG ATTACK : कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां की मानिकपुर चौकी क्षेत्र के दादर गांव में आवारा कुत्तों के झुंड के हमले से 5 साल के मासूम प्रकाश पटेल की मौत हो गई। पहली कक्षा में पढ़ने वाले प्रकाश की मौत से पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।

पिता से मिलकर लौट रहा था, रास्ते में कुत्तों ने घेर लिया

STRAY DOG ATTACK : प्रकाश पटेल के पिता किशोर पटेल मूल रूप से जांजगीर-चांपा जिले के रहने वाले हैं। वे परिवार के साथ दादर में रहकर मजदूरी करते हैं। घटना के समय किशोर पटेल एक घर में काम कर रहे थे। उनका बेटा प्रकाश उनसे मिलने आया था और वापस घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया।

अस्पताल में तोड़ा दम

STRAY DOG ATTACK : कुत्तों ने मासूम को दौड़ा-दौड़ाकर हमला किया और उसके सिर, गले तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें पहुंचाईं। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर पिता दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक कुत्ते उसे गंभीर रूप से घायल कर चुके थे। उन्होंने किसी तरह बेटे को बचाकर तत्काल जिला मेडिकल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

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गांव में शोक, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में मातम पसरा है। स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ रही है और इससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में है।

मानिकपुर चौकी पुलिस ने मेडिकल अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

STRAY DOG ATTACK : ऊर्जा नगरी में हुई इस घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों की समस्या और शहरों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द कुत्तों के बंध्याकरण और पकड़ने का अभियान चलाए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

FAQ: 

भारत में आवारा कुत्तों की समस्या कितनी बड़ी है? 

भारत में आवारा कुत्तों की समस्या विकराल है। देश में लगभग 5.2 से 6 करोड़ आवारा कुत्ते हैं। हर साल लाखों कुत्ते के काटने (डॉग बाइट) के मामले दर्ज होते हैं, और रेबीज के कारण लगभग 20,000 लोग अपनी जान गंवा देते हैं, जो विश्व स्तर पर रेबीज से होने वाली कुल मौतों का बड़ा हिस्सा है।

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क्या आवारा कुत्तों के बंध्याकरण से उनकी आक्रामकता कम हो जाती है?

हाँ, बंध्याकरण (नसबंदी) से आवारा कुत्तों की कुछ विशेष प्रकार की आक्रामकता कम हो जाती है, लेकिन यह सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से हार्मोन (जैसे टेस्टोस्टेरोन) से जुड़े आक्रामक व्यवहार को नियंत्रित करती है।

आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्ति के लिए सरकारों द्वारा क्या उपाय किए जा रहे हैं ? 

आवारा कुत्तों के आतंक को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम 2023 के तहत सख्त कदम उठा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, अस्पतालों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजा जा रहा है।

आवारा कुत्तों के झुंड के हमले से 5 साल के मासूम प्रकाश पटेल की मौत हो गई। पहली कक्षा में पढ़ने वाले प्रकाश की मौत से पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।

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