रायपुर। राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित सीपीएस किड्स एकेडमी द्वारा शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून की धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। आरटीई लॉटरी में नाम आने के बावजूद एक गरीब बच्चे से 16 हजार रुपए फीस वसूलने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्कूल प्रबंधन को आदेश दिया है कि वह छात्र से ली गई पूरी राशि तत्काल वापस करे।

मामला रायपुर के गणेश नगर निवासी तोसूराम साहू का है, जो पेशे से कारपेंटर हैं। तोसूराम ने अपने बेटे रियांश साहू के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्च 2025 में आरटीई के तहत आवेदन किया था। पहली ही लॉटरी में रियांश का चयन सीपीएस किड्स एकेडमी के लिए हुआ।

पोर्टल पर नाम आने के बाद भी स्कूल प्रबंधन और नोडल अधिकारी ने पिता को सही जानकारी देने के बजाय गुमराह किया। मजबूरी में तोसूराम को अपने बेटे का दाखिला सामान्य कोटे में कराना पड़ा। स्कूल प्रबंधन ने इसका फायदा उठाते हुए दो किस्तों में 16 हजार रुपए फीस वसूल लिए।

अभिभावक की शिकायत पर सुनवाई करते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पाया कि स्कूल प्रबंधन ने नियमों की अनदेखी की है। आयोग ने आदेश जारी करते हुए स्कूल प्रबंधन को छात्र से वसूली गई 16 हजार रुपए की पूरी राशि तत्काल अभिभावक को लौटाने के निर्देश दिए। साथ ही छात्र को तत्काल RTE कोटे में शामिल करने के साथ छात्र के शिक्षण शुल्क का भुगतान शासन से नियमानुसार प्राप्त करने के भी निर्देश दिए।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।